यकृत की बीमारी में कारगर साबित हो सकती है हल्दी
आयुर्वेद में शताब्दियों से हल्दी का इस्तेमाल पेट और आंत की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है।
पूर्व में हुए अध्ययनों से स्पष्ट हुआ है कि हल्दी रोग प्रतिरोधक और अनॉक्सीकारक का काम करती है।
पत्रिका 'गट' में प्रकाशित हुए एक नए अध्ययन में यकृत में सूजन की बीमारी के संबंध में बताया गया है। आनुवांशिक गड़बड़ी या स्वप्रतिरोधकता के कारण यकृत की पित्त नलियों में सूजन आ जाती है जिसकी वजह से वह जख्मी और अवरुद्ध हो जाती है।
आस्ट्रिया और अमेरिका के विशेषज्ञों ने यकृत की सूजन की बीमारी से पीड़ित चूहों के यकृत ऊतकों और रक्त का अध्ययन किया था।
चूहों को भोजन में हल्दी देने के चार या आठ सप्ताह पहले और बाद में उनके नमूने की जांच की गई।
वेबसाइट 'टेलीग्राफ डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक भोजन में हल्दी देने के बाद चूहों की पित्त नलियों में अवरोध कम हुआ और कोशिकाओं व यकृत को कम नुकसान पहुंचा। सामान्य भोजन लेने वाले चूहों में यकृत की बीमारी में कोई कमी नहीं देखी गई।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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