स्टीफन कोर्ट आग में मृतकों की संख्या 26 पहुंची (लीड-1)
पांचवीं मंजिल पर मलबे को हटाते समय क्षत-विक्षत अवस्था में दो शव मिले।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "दोनों शवों को एस.एस.के.एम अस्पताल ले जाया गया है ताकि पीड़ितों के परिजन इनकी पहचान कर सकें। एक शव किसी महिला का प्रतीत होता है।"
उधर, कोलकाता नगर निगम की याचिका पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इस इमारत के खतरनाक हिस्से को हटाने की अनुमति दे दी।
स्टीफन कोर्ट के निवासियों को शुक्रवार को डेढ़ घंटे के लिए इमारत में जाने की अनुमति दी गई। इसके साथ हालांकि बचाव दल भी इमारत के अंदर गया। अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों ने इन लोगों को गुरुवार को इमारत में जाने से रोक दिया था। इसको लेकर इमारत के निवासियों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
एक बुजुर्ग व्यक्ति बचाव दल की मदद के बावजूद पांचवीं मंजिल पर नहीं पहुंच सका क्योंकि वहां भारी मात्रा में मलबा पड़ा हुआ था।
छठी मंजिल पर रहने वाली एक महिला ने कहा, "मैं अपने फ्लैट में गई और मुझे मेरे जरूरी सामान मिल गए। मेरे फ्लैट को कोई नुकसान नहीं हुआ।"
कई निवासियों ने कहा कि वह अपने घरों को खंगालने के लिए ज्यादा वक्त चाहते हैं।
कोलकाता के पुलिस आयुक्त गौतम मोहन चक्रबर्ती ने कहा, "हमारी पहली प्राथमिकता मलबे को हटाना है ताकि यदि मलबे में कोई शव हो तो निकाला जा सके क्योंकि कुछ लोग अब भी लापता हैं।"
स्टीफन कोर्ट में मंगलवार दोपहर भीषण आग लगी थी। आग लगने के तुरंत बाद छह लोग इमारत से नीचे कूद गए थे, जिससे उनकी मौत हो गई थी। बुधवार सुबह इमारत की छठी मंजिल से 18 शव बरामद किए गए थे। अभी भी कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।
कोलकाता के इस प्रसिद्ध इमारत का निर्माण वर्ष 1910 में अर्मेनिया के नागरिक स्टीफन एराथून ने की थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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