विल्स फैशन वीक में पश्चिमी शैली और भारतीय शिल्प का मिलन
नई दिल्ली, 26 मार्च (आईएएनएस)। राजधानी में गुरुवार से शुरू हुए 'विल्स लाइफस्टाइल इंडिया फैशन वीक' (डब्ल्यूआईएफडब्ल्यू) में डिजाइनरों द्वारा पेश किए गए परिधानों में पश्चिमी शैली और भारतीय शिल्प का सुंदर समायोजन देखने को मिल रहा है। भारतीयता और सामाजिक चेतना के साथ यह फैशन सप्ताह निश्चित रूप से वैश्विक व अभिनव है।
वैश्विक बाजार से मंदी का दौर खत्म होने व व्यापार के गति पकड़ने के साथ डिजाइनरों को घरेलू फैशन उद्योग को बढ़ाने के लिए मध्य एशिया और यहां तक कि यूरोप के नए ग्राहक मिलने की उम्मीद है।
फैशन सप्ताह में डिजाइनरों द्वारा प्रस्तुत परिधान वर्तमान व्यापार रुझानों से प्रभावित हैं।
हेमंत एंड नंदिता द्वय के हेमंत लालवानी और नंदिता रायपुरानी ने अपने वस्त्र संग्रह को 'फेक इट' नाम दिया है। रायपुरानी ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने अपने वस्त्रों में प्राकृतिक तत्वों का इस्तेमाल किया है। दोनों डिजाइनरों ने मध्य एशिया और यूरोप के खरीददारों के लिए अलग-अलग तरह के वस्त्र डिजाइन किए हैं।
उन्होंने मध्य एशिया के लिए डिजाइन किए परिधानों में रत्नों और स्वारोवस्की का इस्तेमाल किया है जबकि यूरोपीय परिधानों के लिए भारतीय कढ़ाई का इस्तेमाल किया है।
डिजाइनर चारू पाराशर ने अपने वस्त्र संग्रह में मिस्र की वास्तुकला शैली का प्रयोग किया है। वह बताती हैं कि उन्होंने अपने परिधानों में रंगों पर विशेष ध्यान दिया है। चारू ने फैशन सप्ताह के एक महीना पहले से अपने वस्त्र संग्रह पर काम शुरू कर दिया था।
डिजाइनर कविता भारतीय कहती हैं कि उनके वस्त्र संग्रह की खासियत शिल्प और कारीगरी है, जिसे उकेरने के लिए उन्होंने रेशम, जॉर्जेट और कॉटन के धागों का इस्तेमाल किया है।
डिजाइनर नीता भार्गव के हाथ से पेंट किया हुआ वस्त्र संग्रह 'सेव द टाइगर' अभियान से प्रेरित था।
नीता कहती हैं बहुराष्ट्रीय ब्रांड के परिधानों के बाजार में प्रवेश के चलते भारतीय डिजाइनरों को पश्चिमी शैली को अपनाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी परिधान पहनने और देखभाल करने में बहुत आसान होते हैं इसलिए इनकी मांग बढ़ती जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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