बांग्लादेश में शहीदों को श्रद्धांजलि, युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलेगा
पाकिस्तानी सेना ने 40 वर्ष पहले गुरुवार-शुक्रवार की रात को बांग्लादेश के स्वाधीनता संघर्ष को दबाने के लिए नागरिकों का कत्लेआम शुरू किया था।
पाकिस्तानी सेना ने 25 मार्च 1971 की रात को ऑपरेशन सर्चलाइट आरंभ किया और इसमें करीब 7,000 नागरिकों के मारे जाने की अनुमान लगाया गया।
प्रधानमंत्री शेख हसीना ने बुधवार रात को युद्ध अपराधियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति दी। समाचार पत्र डेली स्टार के अनुसार यह बांग्लादेश के इतिहास में नया अध्याय खोलेगा।
बांग्लादेश के अनुसार करीब नौ महीने चले स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान 30 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई। पाकिस्तानी सेना से 16 दिसंबर 1971 को भारत और बांग्लादेश की संयुक्त सेना के सामने समर्पण किया।
पाकिस्तानी सेना के अलावा रजाकार कहे जाने वाली इस्लामी मिलिशिया के सदस्यों ने भी नागरिकों की हत्याएं की।
इनमें से अधिकत्तर पाकिस्तान भाग गए और कई मर चुके हैं। सरकार करीब 1,500 लोगों पर मुकदमा चलाने वाली है, जिनके खिलाफ स्वतंत्रता सेनानियों और स्वयंसेवी संगठनों ने सबूत मुहैया कराएं हैं।
कुछ लोगों के खिलाफ प्रतीकात्मक मुकदमा चलाने की सरकार की योजना का कुछ स्वतंत्रता सेनानी विरोध कर रहे हैं।
आरोपियों में बांग्लादेश की जमात-ए-इस्लामी पार्टी के शीर्ष नेता भी शामिल हैं। बांग्लादेश की शीर्ष इस्लामी पार्टी वर्ष 2001-06 के दौरान सत्ता में साझेदार थी लेकिन अब वह विपक्ष में है।
जमात के अध्यक्ष मोतिउर रहमान निजामी और महासचिव अहमद मोजाहिद ने नागरिकों की हत्याओं में शामिल होने से इंकार किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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