जल्दी ही पाया जा सकेगा भय पर काबू

शोधकर्ताओं का कहना है कि सीधे मस्तिष्क में एक सामान्य एनेस्थीसिया देकर डर से बचाव संभव हो सकता है। शोधकर्ताओं के दल ने गोल्डफिश पर एक प्रयोग किया था। गोल्डफिश को रोशनी चमकने पर भयभीत होने के लिए जाना जाता है।

वेबसाइट 'डेली मेल डॉट को डॉट यूके' के मुताबिक मुख्य शोधकर्ता प्रोफेसर मासायुकी योशिडा का कहना है कि गोल्डफिश रोशनी पड़ने पर भयभीत हो जाती है। उन्होंने कहा कि गोल्डफिश को बिजली का झटका दिया गया था और रोशनी चमकने पर मछलियों को लगा कि उन्हें एक और बिजली का झटका दिया जा सकता है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि इस मछली को प्रयोग शुरू होने से एक घंटे पहले मस्तिष्क के सेरीबेलम हिस्से में लिडोकेन एनेस्थीसिया देने के बाद रोशनी पड़ने पर उनकी ह्रदय की गति सामान्य देखी गई और उनमें भय के कोई भी लक्षण नहीं दिखे।

सेरीबेलम मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो मनुष्यों में भय और खुशी जैसी भावनाओं को नियंत्रित करता है। मछलियों में सेरीबेलम उनके सीखने की क्षमता और गति को नियंत्रित करता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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