जयकारों के बीच जन्मे रामलला, पालने में झूले

बुधवार को दोपहर के 12 बजते ही विभिन्न मंदिरों में झाल-मंजीरे और ढोलक की थाप के साथ जय श्रीराम के जयघोष सुनाई देने लगे। मुख्य समारोह ओरछा के रामराजा मंदिर में हुआ जहां जन्म के समय से पहले ही बधाई गीतों के साथ नाचने का दौर शुरू हो गया । यह सिलसिला रामजन्म के बाद भी चलता रहा। बालरूप भगवान राम को पालने में झुलाया गया।

इसी तरह दमोह के राम मंदिर में एक नवविवाहित जोड़े को दशरथ और मां कौशल्या बनाया गया। यह जोड़ा गर्भगृह से बाल स्वरूप राम के साथ बाहर निकला, फिर राम को पालने में झुलाया गया। इस मौके पर जमकर आतिशबाजी हुई और भक्तों ने बधाई गीतों के बीच नाच कर राम जन्म का आनंद लिया।

प्रदेश में एक ओर जहां अनेक स्थानों पर राम जन्म का आयोजन किया गया, वहीं दूसरी ओर रामनवमी का जुलूस भी निकाला गया। इन समारोहों में हजारों लोग शामिल हुए।

इसके अलावा प्रमुख देवी मंदिरों जैसे मैहर की शारदा माता, टीकमगढ़ की अछरूमाता के मंदिर में सुबह से ही श्रद्घालुओं का तांता लग गया। नवरात्र मे मौके पर बोए गए ज्वार को लेकर भक्तों की टोलियां जगह-जगह निकल रही हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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