सभी गांवों में बैंकिंग सेवाएं चाहता है आरबीआई (लीड-1)

आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा, "प्रत्येक जिले के प्रमुख बैंक को मार्च 2010 तक एक खाका तैयार करने के लिए कहा गया है। यह खाका इस बात को सुनिश्चित कराएगा कि मार्च 2012 तक 2,000 से अधिक आबादी वाले सभी गांवों को किसी बैंकिंग आउटलेट के जरिए वित्तीय सेवाएं सुलभ हो जाएं।"

इसके पहले केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने आरबीआई की नीति में वित्तीय समावेशन का आह्वान किया था। इस पर सुब्बाराव ने कहा कि मार्च 2011 तक इस दिशा में मध्यवर्ती लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा।

मुखर्जी ने बैंकों और अन्य घटकों का सोमवार को आह्वान किया कि उन्हें अब तक उपेक्षित रहे आबादी के हिस्सों के वित्तीय समावेशन के लिए अपनी सोच में परिवर्तन लाना चाहिए।

मुखर्जी ने वित्तीय साक्षरता पर यहां आयोजित एक कार्यशाला में कहा, "हमें वित्तीय समावेशन के लिए नए द़ृष्टिकोणों की आवश्यकता है, जो अतीत से मिली नसीहतों पर खड़ा हो। इसके लिए नीति नियंताओं, पेशेवरों और अन्य घटकों को अब तक उपेक्षित रहे आबादी के हिस्सों तक पहुंचने की आवश्यकता है।"

मुखर्जी ने कहा कि वित्तीय साक्षरता और शिक्षा, वित्तीय समावेशन, समग्र वृद्धि और टिकाऊ समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक समावेशन का लक्ष्य हासिल नहीं हो पाया है, जबकि वित्तीय क्षेत्र की नीतियां वित्तीय पैठ और पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से ही निर्धारित की गई थीं।

मुखर्जी ने कहा, "वित्तीय व्यवस्था की पहुंच बढ़ाने की रणनीति, प्रारंभिक तौर पर शाखाएं बढ़ाने, आरआरबी (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक) जैसे नए संस्थानों की स्थापना करने और आर्थिक रूप से वंचित विशाल तबके के लिए जमा पूंजी सुनिश्चित कराने पर निर्भर थी। यद्यपि इसका अपना प्रभाव रहा और इससे कई सारे लोगों के जीवन में बदलाव भी आया, लेकिन इन प्रयासों के परिणाम मिले-जुले रहे हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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