'एसआईटी के समक्ष मोदी का अनुपस्थित होना कानून का उल्लंघन नहीं'

मोदी के खिलाफ एसआईटी ने समन जारी किया था। दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाला 'जन संघर्ष मंच' (जेएसएम) के मुकुल सिन्हा ने कहा, "शुरू में यह समझा गया कि नोटिस अपराध प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 160 के तहत जारी की गई थी, जिसमें पुलिस के पास गवाह से पूछताछ करने की शक्ति होती है, लेकिन अब हम समझे कि यह मामला नहीं है।"

साम्प्रदायिक दंगों की जांच कर रहे नानावती मेहता आयोग के समक्ष सिन्हा दंगा पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

एसआईटी द्वारा समन जारी करने के बावजूद रविवार को मोदी उपस्थित नहीं हुए थे।

पूर्व पुलिस महानिदेशक आर.बी.श्रीकुमार का मानना है कि यह नोटिस न्याय दिलाने के उदेश्य से जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "यह नोटिस कानूनी रूप से महत्वहीन है। किसी भी मामले की विधिवत जांच के लिए पहले प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है और उसके बाद सीआरपीसी के तहत समन जारी किया जाता है। इस समन की अवमानना पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है।"

एसआईटी की ओर से मोदी को 11 मार्च को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में कहा गया था कि वह 21 मार्च से शुरू हो रहे सप्ताह के दौरान गवाही के लिए एसआईटी के समक्ष उपस्थित हों।

मोदी को यह नोटिस तब जारी किया गया था जब वर्ष 2002 में गुजरात दंगे के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में अन्य लोगों के साथ मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी की विधवा जकिया जाफरी ने इस मुद्दे को उठाया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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