तमिल फिल्में देती हैं अपराध को बढ़ावा !
समाचार पत्र 'मलेशिया नंबन' के मुताबिक 'कंज्यूमर एसोसिएशन ऑफ पेनांग' (सीएपी) के शिक्षा अधिकारी एन. वी. सुब्बाराव का कहना है कि भारतीय युवाओं द्वारा अपराध की जो घटनाएं देखी जा रही हैं वे तमिल फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा से संबंधित हैं।
मलेशिया की आबादी में भारतीय समुदाय के अनुमानित 20 लाख लोग हैं। इनमें मुख्य रूप से तमिल समुदाय के लोग हैं जो भारत से आने वाली तमिल फिल्मों को देखते हैं।
समाचार पत्र 'द स्टार' के सोमवार को प्रकाशित अंक के मुताबिक सुब्बाराव कहते हैं कि सरकार, राजनेता और समुदाय एक-दूसरे पर आरोप लगाने में इतने व्यस्त हैं कि अब तक इन सामाजिक बुराईयों को दूर करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है।
उल्लेखनीय है कि मलेशिया में पहले भी भारतीय समुदाय के नेता अक्सर यह शिकायत करते रहे हैं कि पर्याप्त धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा के अभाव में इस समुदाय के नैतिक व सामाजिक मानकों में गिरावट आ रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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