भारत-पाक वार्ता से नाटकीय परिणाम की उम्मीद नहीं थी : कृष्णा (लीड-1)

समाचार चैनल सीएनएन आईबीएन को दिए एक साक्षात्कार के दौरान भारत-पाक वार्ता के बारे में पूछे जाने पर कृष्णा ने कहा, "दोनों देशों के विदेश सचिवों की बैठक से कोई नाटकीय परिणाम निकलकर सामने आने वाला था, ऐसी हमें कोई उम्मीद नहीं थी।"

उन्होंने कहा, "हमने पाकिस्तान को वार्ता के लिए इसलिए आमंत्रित किया था ताकि वार्ता की शुरुआत हो सके और हम यह समझ सके कि पाकिस्तान की अब तक की राय क्या है।"

कृष्णा ने साफ शब्दों में कहा कि वार्ता के नतीजों से वे तनिक भी निराश नहीं हुए क्योंकि उन्हें बहुत कुछ परिणाम निकलने की उम्मीद ही नहीं थी।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की वर्तमान सोच क्या है, हम यह समझने की कोशिशों में थे। हमें इसमें सफलता मिली। हमारे लिए यह अच्छी बात है।"

कृष्णा ने यह भी कहा कि भारत ने अपने मित्र देशों को बता दिया है कि मुंबई हमले में पाकिस्तान का हाथ होने के उसके पास पुख्ता सबूत हैं।

उन्होंने कहा, "हमने अपने तरीके से अपने मित्र राष्ट्रों को अवगत करा दिया है।" उनसे पूछा गया था कि क्या मुंबई हमले में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में भारत ने अपने मित्र राष्ट्रों को जानकारी दी है?

उन्होंने कहा, "इस बारे में हमारे मित्र राष्ट्रों की क्या प्रतिक्रिया रही, मुझे नहीं लगता कि इस बारे में सार्वजनिक तौर पर कुछ कहा जाना चाहिए।"

कृष्णा ने कहा, "अमेरिका जैसे मित्र राष्ट्रों को इससे अवगत कराकर हम संतुष्ट हैं।"

अफगानिस्तान में प्रभावी हो रही अमेरिकी रणनीति से पाकिस्तान के इशारे पर भारत को अलग-थलग किए जाने संबंधी खबरों का उन्होंने खंडन किया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अफगानिस्तान में भारतीयों की उपस्थिति कम करने के संदर्भ में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर कभी भी दबाव नहीं बनाया। "अमेरिकी प्रशासन से विभिन्न स्तरों पर हुई बातचीत में उसकी ओर से हमें कभी भी अफगानिस्तान से हमारे लोगों की उपस्थिति कम करने के संबंध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दबाव नहीं बनाया गया।"

उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान में भारत की भूमिका की अमेरिका ने हमेशा ही सराहना की है। खुद अफगानिस्तान के लोग भारत की भूमिका की तारीफ करते हैं।"

कृष्णा ने कहा, "मैं नहीं समझता कि भारत को वहां अलग-थलग कर दिया गया है। अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत अहम भूमिका निभा रहा है।"

भारत और अफगानिस्तान के मधुर रिश्तों को पटरी से उतारने की कोशिशों में जुटे आतंकवादियों के लिए अफगानिस्तान में रह रहे भारतीय को सहज निशाना करार देते हुए उन्होंने संकेत दिया कि काबुल में पिछले दिनों हुए आतंकवादी हमले में लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था।

कृष्णा ने कहा, "गत 26 फरवरी को काबुल में हुए आतंकवादी हमले को मैं उन ताकतों की कार्रवाई समझता हूं जो भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों में कड़वाहट पैदा करना चाहते हैं।" इस हमले में सात भारतीयों की मौत हुई थी।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह इस बात से सहमत है कि काबुल पर हुए आतंकवादी हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने अंजाम दिया था, उन्होंने कहा, "यह उन्हीं आतंकवादी संगठनों की करतूत थी।"

उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से अमेरिका भी इस बात को समझता है। क्योंकि वह भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की गतिविधियों पर पैनी नजर रखता है।

कृष्णा ने कहा कि अफगानिस्तान में मानवीय कार्यो के लिए गए भारतीय कार्यकर्ता और भारतीय मिशन पर हमले की चेतावनी तो थी ही क्योंकि भारत अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, "वहां गए भारतीय बगैर अस्त्र-शस्त्र के हैं। जाहिर तौर पर वह आतंकवादियों का आसानी से निशाना बन जाते हैं।" उन्होंने अफगानिस्तान में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि भारतीयों की सुरक्षा के दृष्टि से अफगानिस्तान की सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के अलावा हमें अपनी तरफ से भी अतिरिक्त व्यवस्था करनी चाहिए। इस बारे में विस्तार से बातने से उन्होंने इंकार कर दिया।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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