बाघों की अस्वाभाविक मौत से प्रधानमंत्री चिंतित (लीड-1)
रमेश ने संवाददाताओं से कहा कि गुरुवार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अपनी चिंता जाहिर की।
उन्होंने कहा, "सिंह राज्य सरकारों पर प्रधानमंत्री कार्यालय के द्वारा निगरानी रखे जाने के लिए सहमत हो गए हैं। वह खुद भी विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ इस मसले पर बात करेंगे। खासतौर पर उत्तराखण्ड सरकार के साथ, जहां 'कार्बेट नेशनल पार्क' में बाघों की अधिक संख्या में मौत की खबरें मिल रही हैं।"
रमेश के मुताबिक वर्ष 2010 के शुरू के दो महीनों में 11 बाघों की मौतें हो चुकी हैं, जबकि पिछले साल 66 बाघों की मौत हुई थी।
उन्होंने बताया, "सामान्य तौर पर एक साल में 30 बाघों की मौत होती हैं, लेकिन वर्ष 2009 के दौरान 66 बाघों की मौत हो गई। इनमें से 46 की मौत बाघ आरक्षित क्षेत्र में हुई, जबकि 20 की मौत जंगली इलाकों में हुई। बाघों की संख्या घटने के पीछे स्थानीय नेताओं और माफियाओं का हाथ है, जो वन क्षेत्र की जमीन का खनन और निर्माण के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं।"
रमेश ने कहा कि राज्य सरकारों से निवेदन किया जाएगा कि वे वन अधिकार कानून-2006 के तहत महत्वपूर्ण वन्य जीव पर्यावासों को अधिसूचित किए जाने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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