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भारतीय कंपनी को पासपोर्ट छपाई का ठेका मिलने पर नेपाल में विरोध

नासिक की 'सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया' को मशीन से पढ़े जाने वाले 40 लाख नेपाली पासपोर्ट की छपाई का ठेका तीन साल के लिए प्राप्त हुआ है। नेपाली कैबिनेट ने इस संबंध में शुक्रवार को निर्णय लिया।

इस मामले पर अंतिम निर्णय से पहले उप प्रधानमंत्री सुजाता कोइराला और गृह मंत्री भीम रावल के बीच लंबी बहस हुई। कोइराला यह ठेका भारतीय कंपनी को दिए जाने के पक्ष में थी जबकि रावल का तर्क था कि इससे सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

नेपाल की माओवादी पार्टियों ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए कहा कि नेपाल सरकार अपने बड़े पड़ोसी भारत के सामने झुक गई।

इस निर्णय से नेपाल के सांसद भी नाराज हैं जिन्होंने इसके लिए वैश्विक निविदा जारी करने की सलाह दी थी।

इससे पहले संसद की लोक लेखा समिति ने भारतीय प्रस्ताव को अधिक महंगा कहते हुए खारिज कर दिया था। समिति ने सरकार को सुझाव दिया था कि पहले लगाई गई बोली को बरकरार रखा जाए।

अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के नियमों के मुताबिक नेपाल को मशीन से पढ़े जाने वाले पासपोर्ट को लागू करना है।

इसके लिए सरकार ने वैश्विक निविदा जारी की और उनमें से चार कंपनियों को चुना। इनमें फ्रांस, इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया की कंपनियां शामिल थीं।

सुजाता कोइराला ने फिर भी सरकार से अनुरोध किया कि यह ठेका भारतीय कंपनी को दिया जाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए क्योंकि आईसीएओ की समय सीमा एक अप्रैल को समाप्त हो जाएगी।

आईसीएओ के अनुसार, समय पर इस पासपोर्ट को न लागू कर पाने की स्थिति में नेपाली नागरिकों को विदेश जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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