पशु विशेषज्ञों ने बचाई हथिनी की जान
हथिनी का सफल आपरेशन करने वाले दल के प्रमुख डा. ए. बी. श्रीवास्तव ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में बताया कि हथिनी को 20 माह का गर्भ था। उसे प्रसव दर्द भी हो रहा था मगर प्रसव नहीं हो पा रहा था। उन्होंने कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में पहुंचकर हथिनी का परीक्षण करने पर पाया कि उसका आपरेशन जरूरी है। यह करना उनके लिए अकेले संभव नहीं था।
डा. श्रीवास्तव ने आपरेशन की योजना बनाई और विदेशों के विशेषज्ञों से परामर्श किया। श्रीवास्तव के अनुसार वैजाइनल वैस्टी ब्लोटामी आपरेशन कम ही सफल होते हैं। इस आपरेशन में जच्चा और बच्चा दोनों के मरने का खतरा कुछ ज्यादा ही रहता है। इसी को ध्यान में रखकर 5 पशु विशेषज्ञों के साथ मिलकर आपरेशन शुरू किया।
डा. श्रीवास्तव ने बताया कि आपरेशन शुरू करने से पहले ही उन्हें पता चल गया था कि गर्भ में शिशु मर चुका है ऐसे में हथिनी को बचाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। आखिरकार 50 अन्य लोगों की मदद से उन्होंने आपरेशन कर 105 किलो ग्राम के मृत बच्चे को निकाला और हथिनी को बचाने में कामयाबी हासिल कर ली।
डा. श्रीवास्तव ने बताया कि दुनिया में इस तरह के अब तक 22 आपरेशन ही हुए हैं और भारत का यह पहला आपरेशन था। हथिनी स्वस्थ है और उसकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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