श्रीलंका में तमिलों को विशेष सुविधाएं

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में पहली बार ऐसे खास इकाइयाँ खोली गई हैं ताकि वो देश के अल्पसंख्यकों की भाषा तमिल में बयान ले सकें. इसे एक छोटा पर बेहद महत्वपूर्ण क़दम माना जा रहा है. श्रीलंका में वर्षों से सिन्हला और तमिलों के बीच नस्ली समस्याएं रही हैं.
कोलंबो में तमिल भाषा बोलने वाले किसी श्रीलंकाई नागरिक को अगर पुलिस स्टेशन में कोई बयान देना होता है तो उसे अपने किसी दोस्त या जानकार की मदद लेनी पड़ती है ताकि वो उसका अनुवाद सिन्हला भाषा में कर सके.
दरअसल पुलिसबल में सिन्हला भाषा का प्रमुखता से इस्तेमाल होता है. इस कारण कई बार सिन्हला भाषा में अनुवादित किया हुआ दस्तावेज़ किसी की समझ में नहीं आता. अभी तक तमिल भाषा से जुड़ी सुविधाएं अनौपचारिक हैं और उनके बारे में अनुमान लगाना भी मुश्किल है.
लेकिन स्थिति बदल रही है. कोलंबो में चार पुलिस थानों में अब ऐसी इकाइयाँ शुरू की गई हैं जो तमिल भाषा समझने वाले लोगों के लिए मददगार होंगी. और ऐसी सुविधाएं में वृद्दि करने की भी योजना है.
विशेष प्रशिक्षण
इन इकाइयों में या तो तमिल पुलिसकर्मी तैनात हैं या फिर ऐसे सिन्हला लोग जिन्हें तमिल भाषा में प्रशिक्षण दिया गया है. सरकारी अख़बार डेली न्यूज़ ने इसे एक ऐसा छोटा क़दम बताया है जिससे देश में विभिन्न समुदायों के बीच मेल बढ़ाने में मदद मिलेगी.
अख़बार का कहना है कि देश में ऐसा परिवर्तन होने में आज़ादी के बाद साठ साल का वक्त लग गया और इसका कारण राजनीतिज्ञ और नौकरशाहों की कथित लापरवाही और सुस्ती है. श्रीलंका में रहने वाले करीब तीन चौथाई लोग सिन्हला हैं लेकिन देश के ज़्यादातर तमिल और मुसलमान तमिल भाषा बोलते हैं.
वर्ष 2001 की जनगणना के मुताबिक राजधानी कोलंबो में तमिलों की आबादी करीब 55 प्रतिशत है. देश के उत्तर और पूर्व में जहाँ तमिलों की बड़ी संख्या है, उन्होंने बीबीसी को बताया कि पिछले कुछ महीनों में पुलिस स्टेशनों में तमिल भाषा से जुड़ी सुविधाओं में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई है.












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