नक्सली अभियान से जनजातीय महिलाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट

रांची, 17 मार्च (आईएएनएस)। झारखण्ड के जंगलों में सुरक्षाबलों द्वारा नक्सलियों के विरुद्ध चलाए जा रहे 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' को देखते हुए जंगल में रहने वाली जनजातीय महिलाओं को जंगली क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है। इससे इन महिलाओं के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।

एक जनजातीय महिला का कहना है कि हमें जंगली क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है।

पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला प्रखण्ड की जनजातीय महिला मालती ने बताया, "जंगलों में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे अभियान के कारण हमें जंगली क्षेत्रों में न जाने के लिए कहा गया है। हमारे लिए रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है।"

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और झारखण्ड के बोकारो जिले में पिछले सप्ताह से ही नक्सलियों के विरुद्ध 'ऑपरेशन ग्रीन हंट' शुरू किया गया है। इस अभियान का दायरा रांची, खूंटी, लातेहार, चतरा और हजारी बाग जिलों तक बढ़ाया गया है।

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक नक्सलियों के विरुद्ध झारखण्ड के आठ जिलों में अभियान चलाया जा रहा है।

वहीं दूसरी तरफ सुरक्षाबलों को नक्सलियों और ग्रामीणों को पहचानने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों को अभियान के दौरान जंगली क्षेत्रों में न जाने की सलाह दी गई है।

बोकारो, गिरीडीह और धनबाद में अभियान का नेतृत्व कर रहे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कमांडेंट वी. एस. शर्मा ने बताया, "वास्तव में नक्सलियों और ग्रामीणों के बीच भेद करने में काफी मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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