वैद को पुरस्कार ने मिलने से साहित्य जगत में रोष

इस पुरस्कार के लिए वैद का नामांकन हुआ था लेकिन उन्हें इस आधार पर यह पुरस्कार देने से वंचित रखा गया क्योंकि उनकी पुस्तकों में कथित तौर पर अश्लीलता होती हैं।

उनकी दो पुस्तकें 'नासरीन' और 'बिमल उर्फ जाएं तो जाएं कहां' में कथित अश्लीलता को लेकर खासा विवाद हुआ था।

दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता वाली दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी ने 83 वर्षीय वैद को वर्ष 2008-09 के श्लाका सम्मान के लिए नामांकित किया था। यह दिल्ली सरकार की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च साहित्य सम्मान है।

कांग्रेस के पदाधिकारी पुरूषोत्तम गोयल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी कि वैद की पुस्तकों में अश्लीलता होती है।

इसे लेकर साहित्य समुदाय में रोष व्याप्त हो गया है। ललित कला अकादमी के अध्यक्ष अशोक वाजपेयी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने लेखक की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नजरअंदाज किया है।

वाजपेयी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "यह एक जाने माने लेखक का अपमान है। वैद को सम्मानित करने का फैसला विशेषज्ञों के एक समूह की ओर से लिया गया था। नेताओं और नौकरशाहों ने इस फैसले को अहमियत नहीं दी।"

उन्होंने कहा, "साहित्यिक पुरस्कारों के मामले में नेताओं को दखलंदाजी नहीं करनी चाहिए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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