नेपाल की 'जीवित देवी' की 'अग्नि परीक्षा'

काठमांडू, 15 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल की कठिन स्कूली परीक्षा में बैठने वाले हजारों विद्यार्थियों में चानिरा बज्राचार्य को अग्नि परीक्षा के दौर से गुजरना पड़ेगा। दरअसल, चैनिरा बज्राचार्य को काठमांडू के ललितपुर शहर में कुमारी के रूप में पूजा जाता है। उन्हें नेपाल की 'जीवंत देवी' के रूप में माना जाता है।

समाचार पत्र 'कांतिपुर दैनिक' ने खबर दी है कि यह कुमारी किशोरी भासवारा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से स्कूली परीक्षा में बैठने वाली है।

चैनिरा जब दूसरी कक्षा में थी तभी उसे काठमांडू घाटी के पाटन इलाके की कुमारी के रूप में चुन लिया गया था।

उसके बाद परंपरा का पालन करते हुए उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। लेकिन बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्देश में सरकार से कहा कि वह कुमारियों के अधिकारों को मान्य करे और उन्हें शिक्षा ग्रहण करने की अनुमति प्रदान करे। उसके बाद स्कूल के शिक्षकों ने देवी को उसके घर पर ही जाकर पढ़ाना शुरू किया।

काठमांडू घाटी में तीन कुमारियां हैं। ये कुमारियां किसी समय शाही परिवार की संरक्षित देवियां मानी जाती थीं।

नेपाल में 2008 में राजशाही तो समाप्त हो गई लेकिन उसके बाद भी सरकार ने एक संस्कृति के रूप में इस परंपरा को जारी रखा है।

कुछ खास पवित्र लक्षणों के आधार पर कुमारियों को नेवार समुदाय से चुना जाता है। नेवार समुदाय के लोग भगवान बुद्ध के वंशज माने जाते हैं।

चयनित कुमारियां अपने माता-पिता का घर छोड़ देती हैं और अपने लिए सुनिश्चित स्थान पर रहती हैं। उन्हें जमीन पर चलने की अनुमति नहीं होती। वे या तो बाहों में उठा कर जाती हैं या फिर रथ की सवारी करती हैं।

नेपाल में कुमारियों की छवि एवरेस्ट पर्वत की तरह ऊंची है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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