मुशर्रफ प्रशासन में 90 अरब रुपये की सालाना हेरा-फेरी करते थे तेल माफिया
समाचार पत्र 'न्यूज' के अनुसार मुशर्रफ प्रशासन के दौरान पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय राजस्व बोर्ड, पाकिस्तान स्टेट ऑयल (पीएसओ) और कुछ उच्च प्रशासकों ने जमकर कमाई की थी।
अखबार का कहना है कि 'पाकिस्तान में सैन्य शासन के इस सबसे बड़े संभावित घोटाले' के बारे में जांच से पिछली सरकार ने मना कर दिया था और मौजूदा सरकार भी इस पर तंग नजर आती है।
पाकिस्तान के राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (नैब) ने मुशर्रफ के समय में ही एक जांच की शुरुआत की थी, पंरतु मुशर्रफ ने इस जांच को बंद करने का आदेश दे दिया था। नैब ने उसी जांच के शुरुआती चरण में पाया था कि डीजल के आयात के संबंध में हर साल 90 अरब रुपये की हेरा-फेरी की जाती थी।
नैब के तत्कालीन प्रमुख लेफ्टिनेंट (सेवानिवृत्त) शाहिद अजीज ने भी माना कि यह आंकड़ा सही है। अखबार के अनुसार अजीज ने कहा कि मुशर्रफ के कार्यकाल का शायद यह सबसे बड़ा घोटाला था।
उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का तख्ता पलट करके पाकिस्तान की बागडोर संभालने वाले मुशर्रफ 1999 से 2008 तक राष्ट्रपति रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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