सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फ़ैसले में कहा है कि सरकार सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन दे.
सेना में कार्यरत और सेवानिवृत्त हो चुकीं कुछ महिला अधिकारियों की याचिका पर यह फ़ैसला सुनाया गया है.
जस्टिस एसके कॉल और एमपी गर्ग की खंडपीठ ने कहा कि सेना उन महिला अफ़सरों को दोबारा नौकरी पर रखे जिन्होंने स्थाई कमीशन के लिए अदालत का दरवाज़ा खटखटाया था.
32 पन्ने के अपने फ़ैसले में खंडपीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि उन महिलाओं को भी दोबारा नौकरी दी जाए जो सुनावई के दौरान सेवानिवृत्त हो गई हैं.
20 महिला अफ़सरों के एक गुट ने पिछले साल अदालत में याचिका दायर की थी और सेना में काम करने वाले पुरुषों की तरह महिला अधिकारियों को भी स्थाई कमीशन देने की मांग की थी.
अदालत ने 14 दिसंबर को इस मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा था.
वतर्मान नियमों के अनुसार ज़्यादातर महिलाएँ केवल 14 साल तक सेना में काम कर सकती हैं. इस कारण उन्हें पेंशन और दूसरे फ़ायदे नहीं मिल पाते.
महिलाओं को सेना में अभी केवल 'शॉर्ट सर्विस कमीशन' के तहत भर्ती किया जाता है जबकि पुरुष पाँच साल के बाद स्थाई कमीशन के लिए आवेदन दे सकते हैं.
दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले से सेना में काम करने वाली महिलाओं के सामने नए अवसर खुल जाएँगे.












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