तृणमूल सांसद की नक्सलियों से वार्ता में मध्यस्थता की पेशकश

कोलकाता, 12 मार्च (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पश्चिम बंगाल में कवि तथा गायक के रूप में प्रसिद्ध कबीर सुमन ने कहा कि उनकी इच्छा केंद्र सरकार और नक्सलियों की वार्ता में मध्यस्थता करने की है।

पिछले वर्ष जादवपुर से निर्वाचित कबीर का मानना है कि नक्सलियों के खिलाफ जारी राज्य के अक्रामक अभियान के विरूद्ध आवाज उठाने के लिए जनजातियों के पास एक बहुत मजबूत कारण है।

सुमन (60 वर्ष) ने आईएएनएस को एक साक्षात्कार में कहा, "यदि दोनों पक्ष वार्ता के लिए आगे आते हैं तो मैं मध्यस्थता करने के लिए तैयार हूं। मुझे नक्सलियों और केंद्र के बीच मध्यस्थ बनने में कोई नैतिक हिचक नहीं है।"

नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन ग्रीन हंट चलाने के सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि लोगों का एक समूह पिछड़ी जनजातियों को उनकी ही जमीन से ताकत के बल पर बेदखल करने का प्रयास कर रहा है।

सुमन ने कहा कि अब मामला पूरी तरह केंद्र सरकार के हाथ में है। यदि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम नक्सलियों से बात करना चाहते हैं तो मामला सुलझ सकता है।

इससे पहले शीर्ष नक्सली नेता किशनजी ने कहा था कि यदि केंद्र सरकार अरुं धती रॉय, पूर्व आईएएस अधिकारी बी.डी.शर्मा और कबीर सुमन की मध्यस्थता में वार्ता को तैयार हो तो उनका संगठन हिंसा को त्याग सकता है।

सुमन ने कहा कि वह किशनजी को नहीं जानते और उनसे कभी नहीं मिले। परंतु उनका मानना है कि जनजातियों के पास राज्य के अभियान के खिलाफ आवाज उठाने का मजबूत कारण है।

सुमन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि केंद्र सरकार नक्सलियों से वार्ता की इच्छुक है। उन्होंने राज्य के जनजातीय बहुल इलाकों में अभियान शुरू किया है और स्थानीय जनसंख्या को प्रताड़ित कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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