सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन का आदेश (लीड-2)
न्यायमूर्ति एस.के.कौल और न्यायमूर्ति एम.पी.गर्ग की खंडपीठ ने आदेश दिया कि उन सभी सेवानिवृत्त हो चुकीं शार्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए, जिन्होंने इस संबंध में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
खंडपीठ ने 32 पृष्ठों के अपने आदेश में सरकार को निर्देश दिया है कि याचिका दायर करने वाली और इस दौरान सेवानिवृत्त होने वाली महिला अधिकारियों को बहाल किया जाए।
वायुसेना ने कहा कि वह न्यायालय के फैसले का अध्ययन करेगी। स्थायी कमीशन के लिए लगभग 60 महिला अधिकारियों ने न्यायालय में याचिका दायर की थी। महिला अधिकारियों की वकील रेखा पाली ने कहा कि यह महिला अधिकारियों की एक बड़ी जीत है।
ज्ञात हो कि शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों की सेवाएं अधिकतम 14 वर्ष तक की होती हैं। यहीं पर पुरुष अधिकारी स्थायी कमीशन के तहत 60 वर्ष की उम्र तक सैन्य बलों में कार्यरत रह सकते हैं।
महिला अधिकारियों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
विंग कमांडर रेखा अग्रवाल ने न्यायालय के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मैं काफी खुश हूं। मैं फिर से काम पर जाऊंगी और राष्ट्र की सेवा करूंगी।"
मेजर सीमा सिंह ने कहा, "तीन वर्ष की लड़ाई रंग लाई। न्यायालय ने सेना में महिला अधिकारियों के साथ होने वाली असमानता को आखिर समझ लिया है।"
स्थायी कमीशन के तहत महिलाएं फिलहाल सशस्त्र बलों के मेडिकल, नर्सिग और डेंटल सेवाओं में ही काम करने के योग्य हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन में महिलाएं सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं को मदद देती हैं।
फिलहाल सशस्त्र बलों में 5,137 महिला अधिकारी अपनी सेवाएं दे रही हैं। इनमें से 4,101 थल सेना में, 784 वायुसेना में और 252 नौसेना में हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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