महिला आरक्षण विधेयक पर किसने क्या कहा ?
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह :- महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में चली अब तक की यात्रा का आज एक यादगार दिन है। यह कदम मील का पत्थर साबित होगा। यह महिलाओं को सम्मान है। देश की महान महिला नेत्रियों कस्तूरबा, गांधी, सरोजनी नायडू, एनी बेसेंट, विजय लक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी आदि के बलिदानों को यह छोटी सी श्रद्धांजलि है। यह विधेयक अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति विरोधी नहीं है। यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में अगला कदम है। यह ऐतिहासिक और लीक से हटकर है।
केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली:- अनेक व्यवधानों के बावजूद सभापति हामिद अंसारी की दृढ़ इच्छाशक्ति के लिए हमें उन्हें धन्यवाद देना चाहिए। इस विधेयक को पारित कराकर हमने पूरी दुनिया में महिलाओं के बारे में अपनी राय को और पुख्ता की है।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरुण जेटली :- यह अवसर सभी के लिए ऐतिहासिक और अद्भुत है। जो लोग कहते हैं कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए आरक्षण की आवश्यकता नहीं है, वे गलत हैं। स्वतंत्रता के 63 वर्षो बाद भी आज लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सिर्फ 10.7 फीसदी है। ऐसे में आरक्षण से ही महिलओं को उचित प्रतिनिधित्व मिल सकता है।
कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन :- संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने जनता से किया अपना वादा निभाया है। इस वादे का पूरा करने का साहस यदि किसी भी राजनीतिक दल में है तो वह कांग्रेस पार्टी में ही है। महिलाओं के सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री कभी भी पीछे नहीं हटे।
वृंदा करात, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) :- यह विधेयक महिला संगठनों और आंदोलनों की जीत का नतीजा है। महिलाएं पंचायती राज व्यवस्था में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही हैं। पंचायतों ने गरीब महिलाओं को मौका दिया है और वे ग्रामीण इलाकों का विकास कर रही हैं। इस विधेयक पर राजनीति खत्म होनी चाहिए।
शिवानंद तिवारी, जनता दल (युनाइटेड) :- हम महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करतें हैं। यदि पिछड़ी जातियों को चिह्न्ति कर आरक्षण में शामिल किया जाता तो अच्छा होता। इससे देश का भला होता। बिहार में पंचायती राज व्यवस्था में इस प्रकार के आरक्षण को लागू करने से समाज का लोकतांत्रिकरण हुआ है।
सतीश चंद्र मिश्रा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) :- हम सवर्ण और दलित वर्गो की आर्थिक रूप से पिछड़ी व कमजोर महिलाओं को आरक्षण देने के पक्ष में हैं। महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन कर उसमें दलितों के साथ सवर्ण वर्ग की कमजोर तबके की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान किया जाए। यह विधेयक मौजूदा स्वरूप में हमें स्वीकार नहीं।
तारिक अनवर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा):- देश की महिलाओं को बहुत पहले ही यह राजनीतिक अधिकार मिल जाना चाहिए था। यह धारणा अब पुरानी हो चुकी है कि राजनीति औरतों के वश की बात नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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