बंदूक संस्कृति में विश्वास नहीं रखती असम की युवा पीढ़ी
शिवसागर (असम) , 8 मार्च (आईएएनएस)। असम में प्रतिबंधित संगठन युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) की बंदूक संस्कृति को यहां की युवा पीढ़ी ने खारिज कर दिया है।
शिवसागर में स्थित विभिन्न कॉलेजों के छात्रों में उल्फा के उपाध्यक्ष और एक दशक से अधिक समय बाद जेल से जमानत पर रिहा हुए प्रदीप गोगोई को नजदीक से देखने की उत्सुकता तो थी लेकिन वे उनके विचारों से प्रभावित नहीं दिखे।
उल्फा का यह अलगाववादी नेता गुरुवार को गुवाहाटी केंद्रीय करागार से 12 वर्ष बाद बाहर निकलकर शनिवार को गुवाहाटी से 360 किलोमीटर दूर अपने गृहनगर शिवसागर पहुंचा।
इस अलगाववादी नेता का अहोम क्षेत्र में स्थित रंग घर के मैदान में काफी गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसी जगह पर सात अप्रैल, 1979 को प्रदीप गोगोई और छह अन्य लोगों ने मिलकर उल्फा का गठन किया था।
शिवसागर में प्रदीप गोगोई को देखने पहुंचे तीन छात्रों अनूप गोगोई, अरिंदम दास, निलिम बरुआ रंग घर पहुंचे थे वहीं यहां पर दो हजार से अधिक लोग एकत्रित हुए थे जिनमें से अधिकांश लोग प्रदीप गोगोई का स्वागत करना चाहते थे।
निलिम बरुआ ने कहा, "हम प्रदीप गोगोई को देखने आए हैं लेकिन हम उल्फा की विचारधारा में विश्वास नहीं रखते और न ही उनके अभियान का समर्थन करते हैं।" वहीं बरुआ के दोस्त अनूप ने भी अपने मित्र के विचार से सहमति जताई।
अनूप ने आईएएनएस को बताया, "असम की युवा पीढ़ी उल्फा की बंदूक संस्कृति (हिंसात्मक रवैया) का समर्थन नहीं करती है। हम यहां पर केवल उत्सुकता वश चले आए हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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