वापस नहीं आना चाहते कर्मचारी

विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा है कि काबुल में भारतीय दूतावास का कोई भी कर्मचारी चरमपंथी हमलों के डर से भारत वापस आना नहीं चाहता है.
विदेश मंत्री का कहना था कि अगर कोई कर्मचारी पारिवारिक कारणों से भारत वापस आने का आवेदन करता है तो उस पर विचार किया जाएगा.
इस संबंध में मीडिया में रिपोर्टें आई थीं कि काबुल में भारतीय दूतावास के कर्मचारी लगातार वहां हो रहे चरमपंथी हमलों से डरे हुए हैं और वो भारत वापस आना चाहते हैं.
इस बारे में पूछे जाने पर कृष्णा का कहना था कि वो भारतीय दूतावास पर हुए हमलों के बाद काबुल गए थे और वहां उन्होंने कर्मचारियों से बात भी की थी लेकिन किसी भी कर्मचारी ने हमलों के डर से भारत वापस आने का आग्रह नहीं किया था.
कृष्णा के शब्दों में दूतावास के कर्मचारियों ने कहा कि वो पूरी दृढ़ता से परिस्थियों का सामना करेंगे.
हालांकि उन्होंने साफ़ किया कि अगर कोई कर्मचारी पारिवारिक कारणों से वापस आना चाहता है तो उनके आवेदन पर विचार किया जाएगा और फ़ैसला किया जाएगा.
पिछले हफ्ते एक होटल पर हुए हमले में भारतीय सेना के मेजर पद के तीन अधिकारियों समेत सात भारतीय मारे गए थे.
विदेश मंत्री ने बताया कि काबुल के दो होटलों में हुए हमलों के बाद भारतीय दूतावास के कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है.
अफ़गानिस्तान के कई स्थानों पर चल रहे भारतीय मेडिकल मिशनों को बंद किए जाने के बारे में पूछे गए सवाल पर विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि कंधार, जलालाबाद, काबुल और मज़ार ए शरीफ़ में मिशन का काम सुचारु रुप से चल रहा है.
काबुल में मेडिकल मिशन पर हमले में एक डॉक्टर की मौत हो गई थी.












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