ग्रीस और यूरो दोनों सुरक्षितः मर्केल

Greece Strike

ग्रीस के आर्थिक संकट के चलते यूरो के ढहने के कयासों के बीच जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने ज़ोर देकर कहा है कि यूरो और ग्रीस दोनों सुरक्षित हैं.

एंजेला मर्केल ने ग्रीस के प्रधानमंत्री जॉर्ज पॉपेंड्रयू ने एक मुलाकात के बाद कहा है कि ग्रीस ने जर्मनी से आर्थिक मदद नहीं मांगी है. दोनों की बैठक और मर्केल के बयान के बाद बाज़ारों में यूरो की स्थिति में स्थायित्व आया है.

पिछले कुछ दिनों से जब-जब ग्रीस के अपने उधार न चुका पाने के कयास लगे हैं, यूरो लड़खड़ाया है.

मर्केल ने बैठक के बाद कहा कि ग्रीस के उधार न चुका पाने के बारे में अब बात बंद कर दी जानी चाहिए. यूरो जो की ब्रिटेन को छोड़कर ग्रीस, जर्मनी सहित पूरे यूरोपीय संघ की साझी मुद्रा है, ग्रीस के आर्थिक संकट के सामने आने से भारी दबाव में है.

पर जर्मनी में जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार देश के अधिकांश लोग ग्रीस को आर्थिक मदद देने के खिलाफ हैं.

बैठक के बाद मर्केल ने कहा, "जर्मनी क्या कर सकता है? जर्मनी ग्रीस के साथ एकजुटता प्रदर्शित कर सकता है. जर्मनी हर वो प्रयास करेगा जिससे भावनाएं हावी न हो जाएँ, इसके लिए ये दिखाना ज़रूरी है कि मुश्किल में मित्रता और आपसी समझबूझ कायम रहेगी."

लगातार ऐसी बातें हो रहीं हैं की जर्मनी सहित अन्य यूरोपीय देश ग्रीस को दिवालिया होने से और यूरो को टूटने से बचने के लिए आर्थिक मदद दे सकते हैं. यूरो के टूटने की आशंका से चिंतित यूरोपीय परिषद ग्रीस को लगातार आर्थिक सुधारों के लिए प्रेरित कर रही है.

मर्केल ने ग्रीस के प्रधानमंत्री की तेज़ी से आर्थिक सुधारों को लागू करने के लिए तारीफ भी की.

इस बैठक के बाद ग्रीस के प्रधानमंत्री जॉर्ज पॉपेंड्रयू ने भी कहा की ग्रीस ने कोई आर्थिक मदद अभी नहीं मांगी है. उन्होंने इस सुझाव को भी सिरे से खारिज कर दिया की ग्रीस को आर्थिक संकट से उबरने के लिए अपने कुछ टापू बेच देने चाहिए.

उधर दूसरी तरफ ग्रीस में ख़र्च कम करने के लिए उठाये जा रहे कड़े कदमों के देश में भारी विरोध हो रहा है. हड़तालों ने देश में स्कूलों, यातायात सेवाओं और अस्पतालों को ठप कर दिया है. जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार सरकार के करों को बढ़ाने और बजट में कटौती के प्रस्तावों के खिलाफ देश में काफ़ी गुस्सा है.

कहीं लोगों का कहना है की खर्च कम करने के ये कदम उठाये ही नहीं जाना चाहिए. कुछ अन्य लोग मानते हैं की विरोध करने का कोई रास्ता मतलाब नहीं क्यों की सरकार जो करना चाहती है वो ही करेगी.

कुछ लोग ऐसे भी हैं जो ये तो मानते हैं की हालात ऐसे हैं की कड़े कदम उठाना लाजिमी है लेकिन लोगों इन क़दमों का सामना करने की हालत में नहीं हैं.

कुल मिलाकर आर्थिक संकट और जन विरोध ने ग्रीस की सरकार को ना केवल कुएं और खाई के बीच में ला खड़ा किया है बल्कि पूरे यूरोपीय संघ को डरा दिया है और दुनिया भर के बाज़ार भी दम साधे हुए से इस पूरे घटनाक्रम पर नज़र बनाये हुए हैं.

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