देश महिला आरक्षण विधेयक के लिए तैयार, नीतीश ने दिया समर्थन (राउंडअप)

नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। विधायिका में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने के मसले पर शनिवार को भी देश की राजनीति पार्टियों में सहमति नहीं बन पाई। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुल कर इस विधयेक के पक्ष में आ गए हैं। इसके साथ ही जनता दल (युनाइटेड) में अंतर्विरोध खुल कर सामने आ गया है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्वास जताया है कि सोमवार को जब महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा तो वह पारित हो जाएगा।

प्रधानमंत्री ने यहां एक सम्मेलन में कहा, "हम महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधायिकाओं में एक-तिहाई आरक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में बढ़ रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी सरकार महिलाओं के सर्वागीण सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए जो भी प्रयास करने पड़ें और जो भी संसाधन लगे।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए उनकी सरकार पंचायतों और शहरी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की तैयारी में है। इसके लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद में पहले ही पेश किया जा चुका है।

विधेयक को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सोमवार को राज्यसभा में पेश किया जाएगा। कानून मंत्री एम.वीरप्पा मोइली विधेयक को पेश करेंगे।

यह विधेयक 13 वर्षो से लंबित है। एच.डी.देवगौड़ा की सरकार ने वर्ष 1996 में इसे सबसे पहले संसद में पेश किया था।

संविधान (108वां संशोधन) विधेयक, 2008 को कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और वामदलों का समर्थन है लेकिन समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (युनाइटेड) इसके विरोध में हैं।

बीजू जनता दल (बीजद) ने भी महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन देने की शनिवार को घोषणा कर दी है। बीजद अध्यक्ष और उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने क्योंझर में आयोजित एक बैठक के मौके पर कहा कि बीजद महिलाओं के लिए विधायिका में 33 प्रतिशत आरक्षण का समर्थन करेगा।

विधेयक को पारित होने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत मिलना आवश्यक है। यह संख्या सदन के सदस्यों की कुल संख्या का कम से कम 50 प्रतिशत भी होनी चाहिए।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी उम्मीद जताई है कि महिला आरक्षण विधेयक सोमवार को संसद में पारित हो जाएगा।

आयोग की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने संवाददाताओं से कहा, "हम बहुत खुश हैं कि 14 सालों के संघर्ष के बाद अंतत: इस विधेयक को मान्यता मिली है और इसे महत्व दिया गया है।"

यह पूछे जाने पर कि लालू प्रसाद और मुलायम सिंह ने दलित और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत अलग से आरक्षण देने का सुझाव दिया है, व्यास ने कहा, "लालूजी को अपना मन बदलना चाहिए। ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां विधेयक का समर्थन कर रही हैं, यहां तक कि अब नीतीश कुमार ने भी विधेयक का समर्थन किया है।"

सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की निदेशक रंजना कुमारी ने कहा, "हम दलित और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन इसके कारण विधेयक को रोका नहीं जाना चाहिए।"

लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा है कि महिला आरक्षण विधेयक में महिलाओं के राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए कई अप्रत्याशित वादे शामिल हैं।

'समग्र वृद्धि और ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण' विषय पर आयोजित एक शिखर बैठक में मीरा कुमार ने कहा, "भारत पहला ऐसा देश है, जहां महिलाओं को वोट देने का अधिकार प्रदान किया गया। संसद ने महिलाओं के सशक्तिकरण, उनके कल्याण और उनकी हिफाजत के लिए कई सारे कानून बनाए हैं।"

देश की पहली महिला लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा, "जहां महिलाओं के साथ अत्याचार, दहेज, उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और बलात्कार के खिलाफ संसद में कानून पारित किए गए हैं और उन्हें लागू किया जा रहा है, वहीं हिंसा से दीर्घकालिक तौर पर तभी निपटा जा सकता है जब इसके खिलाफ विधायी सुरक्षा सामाजिक चेतना के विकास के साथ लय हो जाएगी।"

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से विधेयक का समर्थन करने देने की अपील की क्योंकि कांग्रेस सरकार संसद में अल्पमत में हैं।

गडकरी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का विचार सबसे पहले भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की वर्ष 1995 में वड़ोदरा बैठक में रखा गया था।

पार्टी की कोर समिति की बैठक के बाद जारी एक बयान में गडकरी ने कहा कि महिलाओं को पार्टी संगठन में एक तिहाई आरक्षण उपलब्ध कराने वाली भाजपा पहली पार्टी है।

उन्होंने कहा कि भाजपा ने राज्यसभा के अपने सभी सदस्यों को आठ मार्च 2010 को सदन में उपस्थित रहने का व्हिप जारी किया है।

केंद्रीय नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने शनिवार को कहा कि भारत में वास्तविक सत्ता में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण की आवश्यकता है।

नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने यहां आयोजित एक पुस्तक विमोचन समारोह के मौके पर संवाददाताओं से कहा, "वास्तविक सत्ता में भागीदारी पाने से लंबे समय से वंचित रहीं महिलाओं को इस समय सत्ता में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का समय आ गया है।"

अब्दुल्ला ने कहा, "33 प्रतिशत आरक्षण अच्छी शुरुआत है और मुझे उम्मीद है कि विधेयक पारित हो जाएगा।"

अब्दुल्ला ने कहा, "मुझे भरोसा है कि महिलाओं को वास्तविक सत्ता में धीरे-धीरे 50 प्रतिशत भागीदारी मिल जाएगी।"

दूसरी ओर मुस्लिम संगठन, आल इंडिया मिल्ली काउंसिल ने महिला आरक्षण विधेयक में 'आरक्षण के अंदर आरक्षण' की मांग कर दी है और कहा है कि इस विधेयक को वर्तमान रूप में पारित करने के सरकार के कदम के खिलाफ सोमवार को एक विरोध मार्च का आयोजन किया जाएगा।

मिल्ली काउंसिल के महासचिव एम.मंजूर आलम ने शनिवार को यहां कहा कि जंतर मंतर पर आयोजित इस विरोध मार्च में अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समूह और दलित संगठन भी हिस्सा लेंगे।

आलम ने कहा, "यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो यह अल्पसंख्यक और दलित महिलाओं के साथ अन्याय होगा।"

आलम ने कहा कि विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था से देश में विभिन्न वर्गो और समूहों के प्रतिनिधित्व में विषमता पैदा हो जाएगी।

आलम ने आईएएनएस को बताया, "हम आरक्षण में मुस्लिमों, अन्य अल्पसंख्यकों, दलितों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों के लिए आरक्षण की मांग करते हैं।"

आलम ने कहा कि 1952 से लेकर 2009 तक हुए 15 संसदीय चुनावों में मात्र 14 मुस्लिम महिलाएं निर्वाचित हुई हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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