भारत में और अनुवाद कार्य की जरूरत : मुशीरुल हसन
नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। प्रख्यात इतिहासकार मुशीरुल हसन का मानना है कि साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में संगठित अनुवाद कार्य की अनुपस्थिति के कारण भारतीय समाज में सांस्कृतिक और बौद्धिक दूरी बनी हुई है।
जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हसन ने शनिवार को कहा, "इस दूरी के कारण क्षेत्रीयता बढ़ी है और कुछ मामलों में भाषाओं का विनियोजन भी हुआ है। अनेकता में एकता समाप्त हुई है और व्यक्तिगत रूप से कहूं तो इसके कारण मेरे विद्यार्थियों और मेरे बीच दूरी बढ़ी है।"
हसन इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के स्कूल ऑफ ट्रांसलेशन स्टडीज एंड ट्रेनिंग की ओर से ललित कला अकादमी में 'ट्रांसलेशन एंड इंटर-कल्चर कम्युनिकेशन' विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। संगोष्ठी शनिवार को शुरू हुई।
हसन ने कहा, "शिक्षा, साहित्य और समाज में दो और तीन भाषा फार्मूले के एक मानक को अपनाते समय हमने देश को सांस्कृतिक, भाषाई और बौद्धिक दूरियों से परे बनाने पर ध्यान नहीं दिया। हमें दुनिया और अपने खुद के समाज को आपस में जोड़ने के लिए अनुवाद की आवश्यकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications