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मनमोहन-आडवाणी में नोकझोक, पवार पर बरसा विपक्ष (राउंडअप)

By Jaya Nigam
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नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। एक तरफ लोकसभा में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता लालकृष्ण आडवाणी के बीच कश्मीर पर गुप्त बातचीत और रक्षाकर्मियों के लिए एक पद एक पेंशन योजना लागू करने के मुद्दे को लेकर बुधवार को तीखी नोकझोक हुई, वहीं विपक्ष ने एक कथित चीनी घोटाले को लेकर कृषि मंत्री शरद पवार पर राज्यसभा में जमकर हमला किया।

प्रधानमंत्री ने आडवाणी पर हमला बोलते हुए कहा कि वह सैन्य कर्मियों और सरकार के बीच दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। आडवाणी ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2009 के बजट में पूर्व सैनिकों के लिए एक पद एक पेंशन की जिस योजना का वादा किया गया था, उसे आज तक पूरी तरह नहीं लागू किया गया।

मनमोहन सिंह ने कहा, "मैंने जो भी वादा किया था मेरी सरकार ने उसे पूरा किया है। वित्त मंत्री ने बजट में जो वादा किया था उसे भी लागू किया जा चुका है।"

आडवाणी ने 'न्यूजवीक' में प्रकाशित एक रिपोर्ट का भी जिक्र किया, जिसमें भारतीय और अमेरिकी सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान ने कश्मीर पर गुप्त रूप से पिछले दरवाजे से बातचीत शुरू कर दी है। आडवाणी ने इस पर प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा।

इस पर मनमोहन सिंह ने कहा, "राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के दौरान तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंतजी ने कितनी बार अमेरिकी प्रतिनिधियों से बातचीत की? कितनी बार उन्होंने संसद को उसके बारे में सूचित किया? ऐसे में आप मुझसे क्यों काल्पनिक प्रश्नों का जवाब चाहते हैं?"

मनमोहन सिंह ने आडवाणी के उस आरोप को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत अमेरिका के दबाव में शुरू हुई है।

आडवाणी ने सरकार की विदेश नीति पर तीव्र हमला बोलते हुए सवाल किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत-पाकिस्तान के विवादों में हस्तक्षेप क्यों कर रहे हैं।

आडवाणी ने भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों के बीच बातचीत शुरू करने की सरकार की पहल पर भी सवाल खड़ा किया। आडवाणी ने कहा कि इससे देश को अपनी बेइज्जती के सिवा और कुछ भी हासिल नहीं हुआ है।

आडवाणी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान कहा, "अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बार-बार कहा है कि भारत-पाकिस्तान के बीच समस्याओं को सुलझाने के लिए वह सब कुछ करेंगे।"

सिंह ने आडवाणी के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान के साथ बातचीत शुरू की है। सिंह ने इस बात से इंकार किया कि उनकी सरकार जम्मू एवं कश्मीर पर पाकिस्तान के साथ कोई गुप्त समझौता कर रही है।

दूसरी ओर राज्यसभा में उग्र विपक्ष ने भाजपा के नेतृत्व में एक अल्पकालिक चर्चा पर पवार के 70 मिनट के जवाब के दौरान उन पर जमकर हमला किया। यह चर्चा जरूरी उपभोक्ता वस्तुओं की मूल्य वृद्धि पर पिछले सप्ताह आयोजित की गई थी।

विपक्ष ईंधन कीमतों में हुई वृद्धि पर भी उनसे जवाब चाह रहा था, लेकिन पीठासीन अधिकारी पी.जे.कुरियन ने इसकी अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को 2010-11 के बजट पर होने वाली बहस के दौरान उठाया जा सकता है।

पेट्रोल व डीजल की कीमतों में हुई व़ृद्धि के मुद्दे पर दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे आरंभ हुई लोकसभा की बैठक में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर शांतिपूर्ण चर्चा आरंभ हुई। उधर, महंगाई के विषय पर केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही चार बजे तक स्थगित कर दी गई।

सदन की कार्यवाही जब दोपहर बाद दो बजे शुरू हुई तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी सदन में उपस्थित थे। पिछले सप्ताह बजट सत्र आरंभ होने के अवसर पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया था। इस पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस के इंद्रजीत सिंह ने की।

इंद्रजीत सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव को पेश करने में हुए विलंब के लिए खेद प्रकट करते हुए कहा कि विपक्ष के हंगामे के कारण ऐसा हुआ।

गुड़गांव से कांग्रेस के सांसद सिंह ने कहा, "मैं भरे मन से इस प्रस्ताव को रख रहा हूं। राष्ट्रपति एक गैर राजनीतिक संस्था हैं। यह संस्था और इसकी संस्कृति पिछले 60 वर्षो में तैयार हुई है।"

बढ़ी हुई कीमतों पर विपक्ष के लगातार हंगामे से सदन की कार्यवाही के बाधित होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव को और पहले लाया जाना चाहिए था। हंगामे के कारण ऐसा नहीं हो सका।

बजट सत्र के पहले दिन 22 फरवरी को राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील ने संसद के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित किया था।

इससे पहले हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।

लोकसभा की कार्यवाही जैसे ही आरंभ हुई विपक्षी सदस्यों ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई वृद्धि वापस लेने की मांग करते हुए हंगामा आरंभ कर दिया। इससे सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और फिर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

उधर, राज्यसभा में भी प्रश्नकाल के आरंभ होते ही भाजपा सदस्य सदन में पार्टी के उपनेता एस. एस. अहलूवालिया और नरेंद्र पांडेय के नेतृत्व में अपने स्थान पर खड़े हो गए और पेट्रोल, डीजल की बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग करने लगे।

हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी पहले दोपहर 12 बजे, फिर दो बजे और उसके बाद चार बजे तक स्थगित कर दी गई थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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