भारत-सऊदी अरब रच सकते हैं नया अध्याय
देर रात प्रधानमंत्री के यहां पहुंचने पर मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में थरूर ने कहा, "रियाद घोषणा पत्र में आपको ऐसी भाषा देखने को मिल सकती है, जो इससे पहले कभी नहीं देखी गई।" पिछले 28 वर्षो में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली सऊदी अरब की यात्रा है।
रियाद घोषणा पत्र 2006 के दिल्ली घोषणा पत्र को आगे बढ़ाएगा, जिस पर सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए थे। प्रधानमंत्री की इस यात्रा के दौरान सुरक्षा, विज्ञान एवं तकनीक, संस्कृति और मीडिया समेत करीब 10 समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिसमें दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि सबसे अहम है।
दोनों देश सामरिक भागीदारी में विस्तार के साथ ही ऊर्जा और आर्थिक समझौतों में सहयोग बढ़ाने पर सहमत हैं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के मुद्दे पर दोनों पक्ष प्रतिबद्धता जता चुके हैं। थरूर कहते हैं कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में पहले की तुलना में काफी प्रगति होने जा रही है।
सऊदी के शाह के साथ रविवार रात होने वाली बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी उपायों पर मुख्य रूप से चर्चा होगी। अच्छे तालिबान और बुरे तालिबान के मुद्दे पर थरूर ने कहा कि भारत का पक्ष बिल्कुल स्पष्ट है कि धर्म के नाम पर हिंसा फैलाने वालों के साथ कोई बातचीत नहीं हो सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि 26/11 के मुंबई आतंकी हमले की सऊदी अरब के नेताओं ने एक स्वर में निंदा की थी। आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों का रुख एक समान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।













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