बजट में किसान और कृषक अलग-अलग!
नई दिल्ली, 28 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को लोकसभा में अपने बजट भाषण के अंत में कहा था कि 'यह बजट आम आदमी का है। यह किसानों, कृषकों, उद्यमियों और निवेशकों का है।' इसमें बाकी सब तो ठीक है लेकिन किसान और कृषक का फर्क समझ में नहीं आया। असल में वित्त मंत्री ने अपने मूल अंग्रेजी भाषण में 'फार्मर' और 'एग्रीकल्चरिस्ट' शब्द का इस्तेमाल किया है।
बजट को लेकर ब्लॉग की दुनिया में इन दिनों ऐसी ही चर्चा छिड़ी हुई है। 'विस्फोट डॉट कॉम' पर बजट में 'किसान और कृषक अलग-अलग क्यों है दद्दू' शीर्षक से उपरोक्त बातें कही गई हैं। किसान शब्द को लेकर ब्लॉग ने टिप्पणी की, "वित्त मंत्रालय के अनुवादक बाबुओं ने शब्दकोष देखा होगा तो दोनों ही शब्दों का हिंदी अनुवाद किसान, कृषक और खेतिहर लिखा गया है तो उन्होंने बजट भाषण के हिंदी तर्जुमा में इसमें से एक के लिए किसान और दूसरे के लिए कृषक चुन लिया।"
'एक प्याला विचार भरा' ने आम बजट पर कार्टून के जरिए तीखी प्रतिक्रिया दी है। कार्टून में एक भिखारी को देखकर नेता कहता है, "हमारी सरकार गरीबी हटाने को लेकर प्रतिबद्ध है। महंगाई इतनी बढ़ेगी कि न बचेंगे गरीब और न बचेगी गरीबी।"
'मेरा पन्ना' ने टिप्पणी की है, "बजट में कुछ अच्छी बातें रही जैसे कि आयकर की सीमा को डेढ़ लाख किया जाना और कर्जे में डूबे आत्महत्या कर रहे किसानों को कर्जमाफी की राहत। इन दो बातों के अलावा कुल मिलाकर बजट ने सभी को निराश ही किया है।"
'करेंट कार्टून्स' ने 'बजट ने रुलाया है तो हंसाया भी तो है.' शीर्षक से पांच कार्टून पेश किए हैं। एक कार्टून में एक चोर दूसरे चोर से कहता है, "चेन लूटना तो मुश्किल हो जाएगा बॉस, अब कौन पहनेगा सोना?"
'सीधी खरी बात' ने टिप्पणी की है, "आम बजट 2010-11 में वेतनभोगियों के लिए आयकर ने बड़ी राहत दी है। यह सही है कि देश की 80 प्रतिशत जनता किसी भी तरह से कोई कर चुराना नहीं चाहती है पर दरोगा राज और कानूनी पेचीदगियों के चलते कुछ ऐसा हो जाता है कि वह कर देने की तरफ आना ही नहीं चाहती है। कानून इतना सरल और पारदर्शी होना चाहिए कि कोई भी आसानी से कर दे सके।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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