आम बजट : इस साल चौकड़ी भरेगी अर्थव्यवस्था

India Growth Rate
नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2010-11 का आम बजट पेश करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में घोषणा की है कि भारत के लिए बुरा दौर बीत चिका है और हम लगभग उबरने का कगार पर खड़े हैं। हालांकि इसके साथ-साथ उन्होने आने वाले समय में उपस्थित होने वाली चुनौतियों को महत्वपूर्ण कहा है।

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मुखर्जी ने कहा, "मैं कुछ यकीन से कह सकता हूं कि हम संकट से बेहतर ढंग से निपट सकते हैं। यह नहीं कहा जा रहा है कि आज की चुनौतियां नौ महीने पहले की चुनौतियों से कम बड़ी हैं, जब यूपीए सरकार ने सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में दोबारा कार्यभार संभाला था।"

तीन चुनौतियां

मपखर्जी बोले कि कि पिछले वर्ष सूचीबद्ध की गई तीन चुनौतियां आज भी प्रासंगिक हैं। इनमें जल्द से जल्द नौ फीसदी की उच्च विकास दर पर लौटना और उसे दहाई के आंकड़े तक ले जाना, विकास को ज्यादा समग्र बनाना और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करना तथा खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाना शामिल है।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले साल उन्होंने अंतरिम बजट और जुलाई में पूर्ण बजट पेश किया था। उस समय भारतीय अर्थव्यवस्था अनिश्चितता, मंदी और दौर से गुजर रही थी और व्यापार जगत में उत्साह कम था। लेकिन इस साल का बजट वर्ष 2009-10 के आर्थिक सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि में आया है जिसमें कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है जो अगले वर्षो में 10 फीसदी विकास दर के आंकड़े को छू सकती है।

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