सज्जन को मिली अग्रिम जमानत, पीड़ितों को झटका (लीड-4)
न्यायालय ने कहा कि घटना के 25 साल बीत जाने के बाद उन्हें हिरासत में लेना न्यायसंगत नहीं होगा।
हिंसा के शिकार पीड़ितों के लिए यह एक बड़ा झटका है।
न्यायमूर्ति ए.के. पाठक ने कहा, "हमें नहीं लगता कि याचिकाकर्ताओं को जमानत मिलने से निष्पक्ष कार्रवाई पर असर पड़ेगा और मामले से जुड़े गवाहों को न ही धमकाया और डराया जा सकता है।"
उन्होंने कहा, "बेशक, 25 साल तक याचिकाकर्ता फरार रहे क्योंकि उन्हें हिरासत में नहीं लिया गया।"
न्यायमूर्ति ए. के. पाठक ने सज्जन और छह अन्य लोगों को 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर अग्रिम जमानत दे दी।
न्यायालय के 25 पन्नों के आदेश में कहा गया है, "घटना के 25 साल बाद याचिकाकर्ताओं को हिरासत में रखना न्यायसंगत नहीं होगा।"
न्यायालय ने कहा, घटना के 25 साल बीत जाने के बाद मामले की जांच में नए गवाह सामने आए जिन पर विश्वास नहीं किया जा सकता है, वहीं याचिकाकर्ताओं ने पिछले पांच वर्षो से मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को पूरा सहयोग दिया।"
एक स्थानीय न्यायालय ने 17 और 23 फरवरी को कुमार के खिलाफ दो गैर जमानती वारंट जारी किए थे जिसे अब निरस्त कर दिया गया है।
पूर्व सांसद कुमार 17 फरवरी को वारंट जारी होने के बाद से लापता थे।
न्याय के वास्ते लड़ने वालों के लिए यह एक बड़ा झटका है। वरिष्ठ वकील एच.एस.फूल्का ने कहा, "यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और हमारे लिए यह पल दुखद है। हम इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय जाएंगे और हमारी जंग न्याय के लिए जारी रहेगी।"
तिलक नगर स्थित दंगे के पीड़ितों के संगठन '1984 राइट्स विक्ट्म्सि सोसायटी' के अध्यक्ष बाबू सिंह दुखिया ने आईएएनएस से कहा, "आज वर्ष 1984 का दर्द फिर से उभर आया है। न्याय के इंतजार में 25 साल गुजर गए और दो पीढ़ियां खत्म हो गइर्ं, शायद कुछ होने से पहले अगली पीढ़ी भी गुजर जाए।'
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सज्जन कुमार और अन्य के खिलाफ दो मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया था। इन सभी पर 31 अक्टूबर 1984 को इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भीड़ को उकसाने का आरोप है।
सिख विरोधी दंगों में दिल्ली में 3,000 से अधिक सिख मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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