चार साल बाद सबसे आगे होगा भारत

लोकसभा में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा पेश समीक्षा में कहा गया है, "संकट से पूरी तरह उबरने के बाद देश की अर्थव्यवस्था 8.5 फीसदी की दर से बढ़ेगी। इसमें 0.25 फीसदी का उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है। विकास की यह दर वर्ष 2011-12 में नौ फीसदी के आंकड़ें को पार कर जाएगी।"
मंदी से उबरेगा भारत
समीक्षा में कहा गया है, "अगले कुछ समय में यह आशा की जा सकती है कि विकास की दर नौ फीसदी की पटरी पर आ जाएगी जो वैश्विक वित्तीय संकट के कारण काफी नीचे चली गई थी।" समीक्षा में कहा गया है कि ऐसे कई कारण है जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि देश की अर्थव्यस्था की जड़ अब भी काफी मजबूत है। आज भी एक बहुत बड़ा जनसमूह कृषि से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ा हुआ है।
समीक्षा के मुताबिक कृषि क्षेत्र में चार फीसदी की विकास दर हासिल करने के लिए गंभीर नीतिगत कदम उठाने की जरूर है। इसमें कहा गया है, "जहां तक वर्तमान स्थिति का सवाल है तो आपूर्ति दबाव के कारण महंगाई में वृद्धि हुई है।"बेमेल आपूर्ति से निपटने के लिए विभिन्न स्थानों पर पर्याप्त और समय से इन सामानों की आपूर्ति वास्तविक चुनौती है।












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