महंगाई पर संसद से सड़क तक हंगामा (राउंडअप)

केंद्रीय कृषि एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री शरद पवार ने लोकसभा में तकरीबन छह घंटे तक चली इस बहस का जवाब देते हुए कहा कि आवश्यक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में अब धीरे-धीरे कमी आने लगी हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि महंगाई से आम आदमी को बहुत परेशानी झेलनी पड़ी है लेकिन ऐसा नहीं है कि सरकार ने इसे रोकने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि महंगाई रोकने के लिए जो कदम उठाने की आवश्यकता थी, सरकार ने वह कदम उठाए।

पवार ने कहा, "महंगाई गंभीर विषय है। इससे जनता सीधे तौर पर प्रभावित हुई है। इसे रोकने के लिए सरकार को जो कदम उठाने की आवश्यकता है वह सरकार की ओर से उठाए जा रहे हैं।"

उन्होंने कहा, "चाहे आवश्यक उपभोक्ता कानून में सुधार कर राज्य सरकारों को और अधिक अधिकार देने की बात हो या फिर उन्हें खाद्यान्न आवंटित करने का मामला हो, सरकार की तरफ से हर कोशिश की गई। यहां तक कि विपक्ष की मांग पर मुख्यमंत्रियों की बैठक भी बुलाई गई।"

पवार ने कहा, "कई सदस्यों ने दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बताई और महंगाई के लिए सरकार के कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया लेकिन मेरे पास भी रोजाना बाजार के आंकड़े आते हैं। मेरे पास उपलब्ध आंकड़े साफ करते हैं कि आवश्यक उपभोग की कई वस्तुओं की कीमतों में अब कमी आने लगी है।"

पवार ने अपनी बात के समर्थन में पिछले तीन महीने से लेकर गत बुधवार तक आवश्यक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में आए बदलाव का ब्योरा भी पेश किया। यही नहीं उन्होंने अखबारों की कतरनों को भी पढ़कर सुनाया जिनमें कहा गया था कि महंगाई अब कम होने लगी है।

उन्होंने कहा, "वाकई महंगाई से स्थिति बहुत गंभीर हो गई थी। सरकार भी इसे लेकर कम चिंतित नहीं है। सरकार ने कई कदम उठाए, जिनमें दीर्घकालिक और अल्पकालिक कदम भी शामिल हैं। किसानों और आम आदमी को राहत देने के लिए सरकार ने हरसंभव प्रयास किया है।"

कृषि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट समूचे विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन किया।

बहस के दौरान हस्तक्षेप करते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कीमतों में वृद्धि के लिए थोक मूल्यों और खुदरा कीमतों में भारी अंतर पैदा करने वाले बिचौलियों के जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए रणनीति बना रही है। इसके लिए सदस्य या राज्यों के मुख्यमंत्री चाहें तो अपने सुझाव भी दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश समाज के सर्वाधिक पीड़ित तबके को राहत पहुंचाना है। जहां तक गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों के आंकड़े का सवाल है हम इस बारे में योजना आयोग के आंकड़ों को आधार मानकर काम करते हैं।

इससे पहले, खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में चली बहस के दौरान समूचे विपक्ष ने केंद्र सरकार और उसकी नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। भाजपा ने तो महंगाई को आम जनता पर थोपे गए अघोषित कर के साथ-साथ इसे एक महाघोटाला भी करार दिया तथा इसकी जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की मांग की।

लोकसभा में नियम 193 के तहत महंगाई पर बहस की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज सरकार पर जमकर बरसीं और इसे 'महंगाई का महाघोटाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार बढ़ते हुए मूल्यों पर लगाम कसने में पूरी तरह असफल रही है।

विपक्ष की नेता कहा, "यह सरकार की आर्थिक नीतियों की असफलता का ही परिणाम है कि आम आदमी के मुंह से निवाला गायब हो गया है। पिछले कुछ महीनों में गेहूं, चावल, चीनी और दाल के मूल्य दोगुने हो गए हैं। कृषि मंत्री बफर स्टॉक बनाने में असफल रहे हैं जबकि हमारे पास चीनी का अतिरिक्त स्टॉक है।"

आवश्यक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों के पीछे महाघोटाला होने की बात करते हुए सुषमा ने कहा, "मैं आपसे मांग करना चाहती हूं कि एक संयुक्त संसदीय समिति गठित की जानी चाहिए जो इस महाघोटाले का पर्दाफाश करे और बताए कि आयात-निर्यात जो बार बार खुल रहे थे उसके पीछे आखिकार क्या मामला था।"

स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मुद्रास्फीति दर और विकास दर की तुलना करना चाहिए। उन्होंने कहा, "विकास दर का लाभ कम लोगों को मिला है जबकि कई लोग मुद्रास्फीति के शिकार हुए हैं।"

उन्होंने संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी से आग्रह किया कि महंगाई रोकने के लिए वह प्रधानमंत्री को निर्देश दें।

समाजवादी पार्टी (सपा) के मुलायम सिंह यादव ने बहस में भाग लेते हुए महंगाई के लिए सरकार की नियत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार में यदि दृढ़ इच्छाशक्ति होगी तो महंगाई पर लगाम कसी जा सकती है। उसमें इच्छाशक्ति का अभाव है।

मुलायम ने कृषि मंत्री शरद पवार को आगाह किया कि महंगाई के लिए कांग्रेस उन्हें बलि का बकरा बना रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिला स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को संदेश भिजवाया है कि महंगाई के लिए कृषि मंत्री जिम्मेदार है। "इसलिए मैं कहता हूं कि आप हमारे साथ आ जाइए।" राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लालू प्रसाद ने भी मुलायम की हां में हां मिलाई।

जनता दल (युनाइटेड) के शरद यादव ने महंगाई के लिए सरकार के कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। केंद्र सरकार द्वारा महंगाई के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराए जाने का विरोध करते हुए यादव ने कहा कि महंगाई के पीछे एक बड़ा कारण भ्रष्टाचार भी है। जब तक इस पर लगाम नहीं कसी जाएगी तब तक महंगाई पर काबू पाना आसान नहीं होगा।

लालू ने कहा कि महंगाई की आड़ में जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले फल-फूल रहे हैं। लोगों की थाली से दाल, प्याज और अनाज गायब हो गया है। उन्होंने कहा, "महंगाई इतनी बढ़ गई कि उन्हें सड़क पर आंदोलन के लिए उतरना पड़ा। केंद्र की यह सरकार व्यापारियों की सरकार हो गई है। महंगाई एक महीने में नहीं रूकी तो क्या हाल होगा, मैं नहीं जानता। हो सकता है आपको बीच में ही जाना पड़ जाए। हालत बद से बदतर है।"

राज्यसभा में भी महंगाई के विषय पर चर्चा में भाग लेते हुए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने चीनी क्षेत्र में हुए घोटाले के मामले में श्वेत पत्र लाए जाने या फिर सयुंक्त संसदीय समिति से जांच कराए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार चीनी मिल मालिकों के फायदे की नीतियां तैयार कर रही है।

उधर, महंगाई के मसले पर भाजपा नेताओं ने पूर्व पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ लखनऊ में प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें राजनाथ सहित 50 से अधिक नेता और कार्यकर्ता घायल हो गए।

भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ता शांतिपूर्ण मार्च करने जा रहे थे तभी पुलिस ने बेवजह बल प्रयोग किया और रबर की गोलियां चलाईं, जिसमें हमारे कई कार्यकर्ता और कई वरिष्ठ नेता घायल हो गए।

राजनाथ सिंह, मुरली मनोहर जोशी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी, विनय कटियार सहित तमाम केंद्रीय नेताओं के संबोधन के बाद जैसे ही रैली समाप्त हुई, कार्यकर्ता और नेता विधानसभा जाने के लिए आगे बढ़ने लगे तभी वहां मौजूद भारी संख्या में पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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