महंगाई पर विपक्ष ने संसद में सरकार को घेरा
लोकसभा में नियम 193 के तहत महंगाई पर बहस की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज सरकार पर जमकर बरसीं और इसे 'महंगाई का महाघोटाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेसनीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार बढ़ते हुए मूल्यों पर लगाम कसने में पूरी तरह असफल रही है।
विपक्ष की नेता कहा, "यह सरकार की आर्थिक नीतियों की असफलता का ही परिणाम है कि आम आदमी के मुंह से निवाला गायब हो गया है। पिछले कुछ महीनों में गेहूं, चावल, चीनी और दाल के मूल्य दोगुने हो गए हैं। कृषि मंत्री बफर स्टॉक बनाने में असफल रहे हैं जबकि हमारे पास चीनी का अतिरिक्त स्टॉक है।"
सुषमा स्वराज ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को मुद्रास्फीति दर और विकास दर की तुलना करना चाहिए। उन्होंने कहा, "विकास दर का लाभ कम लोगों को मिला है जबकि कई लोग मुद्रास्फीति के शिकार हुए हैं।"
उन्होंने संप्रग की अध्यक्ष सोनिया गांधी से आग्रह किया कि महंगाई रोकने के लिए वह प्रधानमंत्री को निर्देश दें।
समाजवादी पार्टी (सपा) के मुलायम सिंह यादव ने बहस में भाग लेते हुए महंगाई के लिए सरकार की नियत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार में यदि दृढ़ इच्छाशक्ति होगी तो महंगाई पर लगाम कसी जा सकती है। उसमें इच्छाशक्ति का अभाव है।
मुलायम ने कृषि मंत्री शरद पवार को आगाह किया कि महंगाई के लिए कांग्रेस उन्हें बलि का बकरा बना रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने जिला स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को संदेश भिजवाया है कि महंगाई के लिए कृषि मंत्री जिम्मेदार है। "इसलिए मैं कहता हूं कि आप हमारे साथ आ जाइए।" राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लालू प्रसाद ने भी मुलायम की हां में हां मिलाई।
जनता दल (युनाइटेड) के शरद यादव ने महंगाई के लिए सरकार के कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। केंद्र सरकार द्वारा महंगाई के लिए राज्य सरकारों को जिम्मेदार ठहराए जाने का विरोध करते हुए यादव ने कहा कि महंगाई के पीछे एक बड़ा कारण भ्रष्टाचार भी है। जब तक इस पर लगाम नहीं कसी जाएगी तब तक महंगाई पर काबू पाना आसान नहीं होगा।
लालू ने कहा कि महंगाई की आड़ में जमाखोरी और कालाबाजारी करने वाले फल-फूल रहे हैं। लोगों की थाली से दाल, प्याज और अनाज गायब हो गया है। उन्होंने कहा, "महंगाई इतनी बढ़ गई कि उन्हें सड़क पर आंदोलन के लिए उतरना पड़ा। केंद्र की यह सरकार व्यापारियों की सरकार हो गई है। महंगाई एक महीने में नहीं रूकी तो क्या हाल होगा, मैं नहीं जानता। हो सकता है आपको बीच में ही जाना पड़ जाए। हालत बद से बदतर है।"
उधर, राज्यसभा में भी गुरुवार को महंगाई के विषय पर चर्चा हुई। इसमें भाग लेते हुए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वृंदा करात ने चीनी क्षेत्र में हुए घोटाले के मामले में श्वेत पत्र लाए जाने या फिर सयुंक्त संसदीय समिति से जांच कराए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार चीनी मिल मालिकों के फायदे की नीतियां तैयार कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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