पाक छोड़ भारत आना चाहते हैं सिख

ज्ञात हो कि रविवार को पाकिस्तानी तालिबानियों ने दो सिखों का अपहरण कर पेशावर के पास उनके सिर कलम कर दिए थे। इस घटना के बाद पाकिस्तान में बसे हुए सिख सहम गए हैं। अभी भी कुछ सिख तालिबान के कब्जे में हैं। तालिबानियों ने इस वारदात को सिर्फ इसलिए अंजाम दिया, क्योंकि अपहरण के बाद फिरौती की रकम अभी तक नहीं पहुंची है।
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पेशावर में रह रहे सिखों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि अब वे वहां नहीं रहना चाहते। इस प्रकार की घटना अगन आगे हुई तो यहां जिंदगी भी मौत के समान हो जाएगी। पाकिस्तान में तमाम सिख ऐसे भी हैं, जिनके रिश्तेदार भारत में रह रहे हैं। मारे गए सिख जसपाल सिंह के एक चचेरे भाई अरविंद सिंह ने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को बताया, "हम भारत लौटना चाहते हैं। लेकिन हमें वीजा नहीं मिल रहे हैं। तालिबान लगातार हमसे जजिया मांग रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि तालिबान के कारण पाकिस्तान में सिखों के व्यापारिक हितों का भारी नुकसान हो रहा है। एक अन्य सिख ने कहा कि वे सब भय के साये में जीवन बिता रहे हैं। वे सभी नया जीवन शुरू करने के लिए अमृतसर जाना चाहते हैं।
चारों तरफ कड़ी निंदा
इधर भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने सोमवार को कहा, "हम तालिबान की इस जघन्य कार्रवाई की निंदा करते हैं।" इस घटना की देश भर में चौतरफा निंदा हुई है और सरकार से अल्पसंख्यकों की हिफाजत के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने को कहा गया है।
शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) और पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान के कबायली इलाके में सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी मामले में दखल देने की मांग की। एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा, "यह एक निंदनीय कृत्य है। सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को इस मामले को पाकिस्तानी सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।"
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पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा, "इस मामले में केंद्र सरकार को निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। सिखों की जान की सुरक्षा की जानी चाहिए।" कांग्रेस ने कहा कि इस घटना के बारे में भारत सरकार को पाकिस्तान के साथ बात करनी चाहिए। कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने सोमवार को संवादाताओं से कहा, "यह गंभीर मुद्दा है और इस पर पाकिस्तान के साथ बात करने की जरूरत है। यह घटना उन वैश्विक ताकतों के लिए भी एक संदेश है जो अच्छे और बुरे तालिबान में फर्क करने की कोशिश कर रही हैं।"
इस मसले पर भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार से कहा है कि वह अपहृत सिख युवकों की मुक्ति सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाए। अभी तक इस घटना की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है।
पाक ने कहा कड़ी कार्रवाई होगी
इस बीच पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी सिख युवक का सर कलम किए जाने की घटना की सोमवार को निंदा की है। राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता ने कहा कि जरदारी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए अधिकारियों से कहा है कि वे इस मामले की जांच करें और कानून के मुताबिक अपहर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें। जरदारी ने प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की है ताकि इस तरह की घटना भविष्य में दोबारा न घटे।












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