लाहौल में सर्दियों में होता है उत्सव का माहौल
विशाल गुलाटी
केलांग (हिमाचल प्रदेश), 22 फरवरी (आईएएनएस)। लाहौल में इस समय तापमान शून्य से 15 डिग्री सेल्सियस नीचे है और बर्फ से ढकी पूरी घाटी का संपर्क शेष भारत से कटा हुआ है। ऐसे मौसम को कठोर कहा जा सकता है लेकिन स्थानीय निवासियों को विवाह समारोहों और उत्सवों में नाचते गाते और भोज का आनंद लेते देखने पर ऐसा नहीं लगता।
लाहौल और स्पीति जिले की केलांग घाटी भारी बर्फबारी के कारण पांच महीने से अधिक समय तक शेष दुनिया से कटी रहती है।
इस इलाके में सर्दियों में जाना आसान नहीं है। सप्ताह में एक बार आने वाली हेलीकॉप्टर सेवा परिवहन का एकमात्र साधन है। इसमें अधिकांशत: सरकारी कर्मचारियों का आरक्षण रहने के कारण स्थानीय लोगों के लिए यह भी आसान नहीं होता।
इस बार सड़क मार्ग को 10 दिसम्बर को बंद कर दिया गया और इसके मध्य मई में खुलने की उम्मीद है।
स्थानीय निवासी सोनम नेगी ने कहा, "यह हमारे जीवन का सबसे बेहतरीन समय होता है जब हम आराम करते हैं और उत्सवों का आनंद लेते हैं। इससे खेतों में काम करने, चारा और लकड़ी जुटाने जैसे रोजाना के कामों से आराम मिलता है।"
उन्होंने बताया कि इलाके के लोग छह महीने (मई से अक्टूबर) काम करते हैं और छह महीने आराम करते हैं। गर्मियों में छह महीने खेती होती है और उत्पाद को बाजार में बेचने के साथ ही सर्दियों के लिए राशन, चारे और जलावन की व्यवस्था की जाती है।
पूरे जिले में अधिकांशत: जनजातियां निवास करती हैं। लाहुल जिले में लोग अधिकांशत: मटर और आलू का उत्पादन करते हैं। यहां के आलू की मांग पश्चिम बंगाल, बिहार और कर्नाटक में काफी है।
अधिकांश स्थानीय त्योहार और उत्सव सर्दियों में ही पड़ते हैं।
पुरुष अपना समय बिताने के लिए अधिकांश समय 'छोलो' नामक स्थानीय जुआ खेलने में बिताते हैं और जौ से बनी 'अराह' नामक शराब का सेवन करते हैं।
बच्चों के जन्म और विवाह भले ही गर्मियों में हों लेकिन उनका समारोह सर्दियों में ही मनाया जाता है। प्रसिद्ध पर्यटक स्थल मनाली से रोहतांग दर्रे से होकर केलांग पहुंचा जा सकता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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