विवादास्पद विधेयक कश्मीर विधानसभा में वापसी के लिए तैयार

'सांप्रदायिक और असंवैधानिक' कहे जाने वाले जम्मू एवं कश्मीर स्थायी निवासी (अयोग्यता) विधेयक ने 2004 में तत्कालीन कांग्रेस-पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की गठबंधन सरकार के लिए खतरा पैदा कर दिया था। वर्ष 2004 में यह विधेयक पहली बार प्रस्तुत किया गया था।

उस समय विपक्ष की भूमिका निभाने वाली नेशनल कांफ्रेंस इस विधेयक का समर्थक रही है जबकि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जैसी राष्ट्रीय पार्टियां इसका विरोध करती रही हैं।

यदि यहां की महिलाएं राज्य के बाहर के पुरुषों से विवाह करती हैं तो यह विधेयक उनको राज्य में उनकी अचल संपत्ति की वारिस होने, सरकारी नौकरी पाने और अन्य सुविधाओं से वंचित करता है।

पीडीपी-कांग्रेस की सत्ता के समय के विवादों में यह विधेयक सबसे बड़ा विवाद था। पीडीपी द्वारा प्रस्तावित यह विधेयक राज्य विधानसभा के निचले सदन में पारित हो गया था लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना के बाद कांग्रेस के विरोध के चलते उच्च सदन में इसे पारित नहीं कराया जा सका था।

विधानसभा के 45 दिवसीय बजट सत्र में पीडीपी के मुजफ्फर हुसैन बेग इस विधेयक को फिर पेश करेंगे।

यद्यपि यह देखना रोचक होगा कि नेशनल कांफ्रेंस इस विधेयक के प्रति क्या रुख रखती है जबकि उसकी सत्तारूढ़ साथी कांग्रेस इसका विरोध करेगी।

पीडीपी के एक नेता ने कहा, "विधेयक पेश किया जाएगा और देखा जाएगा कि अब नेशनल कांफ्रेंस इस पर क्या कदम उठाती है।"

यदि यह विधेयक पारित हो जाता है तो जो लोग इससे प्रभावित होंगे उनमें पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी और केंद्रीय मंत्री फारुक अब्दुल्ला की दो बेटियां शामिल होंगी। सईद और अब्दुल्ला की बेटियों ने कश्मीर के बाहर के लोगों के साथ विवाह किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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