सर कलम किए जाने की घटना के बाद भारत भागना चाहते हैं सिख (राउंडअप)
तालिबानी आतंकवादियों ने पेशावर के निकट खबर एजेंसी की तिराह घाटी से जसपाल सिंह और दो अन्य सिखों गोरवंदर सिंह और सुरजीत सिंह को अगवा कर लिया था। जसपाल का शव रविवार को बरामद किया गया जबकि गोरवंदर और सुरजीत अब तक आतंकवादियों के कब्जे में हैं।
लेकिन बीबीसी ने कहा है कि दो सिखों की हत्या की गई है। दूसरे सिख की पहचान मस्तान सिंह के रूप में की गई है।
मीडिया में आई खबरों के मुताबिक तीन-चार की संख्या में सिख युवकों को 34 दिनों पूर्व अगवा किया गया था। तालिबान ने उनकी रिहाई के लिए तीन करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी।
इस मामले पर विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, "हम तालिबान की इस जघन्य कार्रवाई की निंदा करते हैं।"
इस घटना की देश भर में चौतरफा निंदा हुई है और सरकार से अल्पसंख्यकों की हिफाजत के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाने को कहा गया है।
शिरोमणि गुरद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) और पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान के कबायली इलाके में सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने संबंधी मामले में दखल देने की मांग की।
एसजीपीसी अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ ने कहा, "यह एक निंदनीय कृत्य है। सिखों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को इस मामले को पाकिस्तानी सरकार के समक्ष उठाना चाहिए।"
पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने कहा, "इस मामले में केंद्र सरकार को निष्क्रिय नहीं रहना चाहिए। सिखों की जान की सुरक्षा की जानी चाहिए।"
कांग्रेस ने कहा कि इस घटना के बारे में भारत सरकार को पाकिस्तान के साथ बात करनी चाहिए।
कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने सोमवार को संवादाताओं से कहा, "यह गंभीर मुद्दा है और इस पर पाकिस्तान के साथ बात करने की जरूरत है। यह घटना उन वैश्विक ताकतों के लिए भी एक संदेश है जो अच्छे और बुरे तालिबान में फर्क करने की कोशिश कर रही हैं।"
इस मसले पर भारतीय जनता पार्टी ने भी सरकार से कहा है कि वह अपहृत सिख युवकों की मुक्ति सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बनाए।
अभी तक इस घटना की जिम्मेदारी किसी भी संगठन ने नहीं ली है।
जसपाल सिंह के एक चचेरे भाई अरविंद सिंह ने एक पाकिस्तानी टीवी चैनल को बताया, "हम भारत लौटना चाहते हैं। लेकिन हमें वीजा नहीं मिल रहे हैं। तालिबान लगातार हमसे जजिया मांग रहे हैं।"
अरविंद सिंह ने कहा कि तालिबान के कारण पाकिस्तान में सिखों के व्यापारिक हितों का भारी नुकसान हो रहा है।
एक अन्य सिख ने कहा कि वे सब भय के साये में जीवन बिता रहे हैं। वे सभी नया जीवन शुरू करने के लिए अमृतसर जाना चाहते हैं।
इस बीच पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी सिख युवक का सर कलम किए जाने की घटना की सोमवार को निंदा की है।
राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता ने कहा कि जरदारी ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए अधिकारियों से कहा है कि वे इस मामले की जांच करें और कानून के मुताबिक अपहर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें।
जरदारी ने प्रभावी कदम उठाने की भी मांग की है ताकि इस तरह की घटना भविष्य में दोबारा न घटे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications