सुकना भूमि घोटाला : दागी अधिकारी को एक और मौका (लीड-1)
सशस्त्र बल न्यायाधिकारण की दो न्यायाधीशों की खण्डपीठ ने लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश की याचिका पर अपने आदेश में कहा, "याची को मामले के गवाहों के साथ सवाल-जवाब करने के लिए दो महीने का समय दिया जाता है।"
ज्ञात हो कि प्रकाश 31 जनवरी को सेना मुख्यालय में सैन्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) ए.के.माथुर और लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एस.एस.ढिल्लन की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया है, जब प्रकाश ने अपनी याचिका में कहा कि सैन्य कानून की धारा 180 के तहत वह राहत पाने के हकदार हैं, क्योंकि उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। प्रकाश ने यह भी कहा कि न्यायिक जांच के दौरान उनकी कोई बात नहीं सुनी गई और न तो उन्हें गवाहों से सवाल-जवाब करने की ही अनुमति दी गई।
प्रकाश के वकील ज्योति सिंह ने आईएएनएस को बताया, "अब सेना उन सभी गवाहों को फिर से बुलाएगी और प्रकाश की उपस्थिति में उनसे पूछताछ की जाएगी।"
लेकिन इस मामले से संबंधित सूत्रों ने प्रकाश की बात पर आश्चर्य प्रकट किया है। सूत्रों ने कहा कि प्रकाश न्यायिक जांच के दौरान शुरू से अंत तक मौजूद थे, लेकिन जब भी उनसे पूछा गया कि क्या वह कुछ कहना चाहते हैं या किसी गवाह से सवाल-जवाब करना चाहते हैं, तो वे हमेशा मौन रहे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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