'आम आदमी' को राहत सर्वोच्च प्राथमिकता : राष्ट्रपति (राउंडअप)

राष्ट्रपति ने जहां नक्सलवाद को देश के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती करार दिया वहीं आतंकवाद के बढ़ते खतरों से भी उन्होंने देश को आगाह किया। महंगाई से आम आदमी को निजात दिलाने को उन्होंने सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और कहा कि वह इस दिशा में यथासंभव प्रयास कर रही है।

बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "आम आदमी को महंगाई से निजात दिलाना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खुले बाजार में व्यापक सुधार की आवश्कता है और सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएगी।"

महंगाई से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार इस दिशा में यथासंभव प्रयास कर रही है।

नक्सलवाद को मौजूदा समय में देश के समक्ष सबसे बड़ी समस्या करार देते हुए राष्ट्रपति ने कहा, "देश में नक्सली हिंसा सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। उन्होंने नक्सलियों से हिंसा का रास्ता त्यागने की अपील की।"

राष्ट्रपति ने कहा, "घुसपैठ के मामलों में आई वृद्धि के बावजूद जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति में सुधार हुआ है।" पाटील ने कहा कि केंद्र सरकार आतंकवाद कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और इसकी चुनौतियों से निपटने के लिए वह सजग है। उन्होंने कहा, "आतंकवादी गतिविधियां कतई बर्दाश्त न करना हमारी सैद्धांतिक नीति है। हमें वैश्विक आतंकवादी समूहों पर लगातार निगरानी रखनी होगी और तत्पर रहना होगा।"

उन्होंने कहा, "कुल मिलाकर वर्ष 2009 के दौरान देश की आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और साम्प्रदायिक घटनाएं नियंत्रित रहीं।"

राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत सार्थक संबंधों के लिए तैयार है बशर्ते वह अपनी जमीन से भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों पर काबू पाने के गंभीर प्रयास करे।

उन्होंने कहा, "अगर पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावशाली कदम उठाता है तो हम उसके साथ सार्थक संबंधों की संभावनाएं तलाशने के लिए तैयार हैं।"

राष्ट्रपति का यह बयान उस समय आया है कि जब दोनों देश सचिव स्तर की वार्ता करने जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2008 में मुंबई पर हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता स्थगित कर दी थी। परंतु़ अब दोनों देश 25 फरवरी को नई दिल्ली में सचिव स्तर की वार्ता के लिए तैयार हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश ने मजबूत नीतियों के साथ न केवल वैश्विक वित्तीय संकट का सामना किया वरन इस वित्तीय वर्ष में 7.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर भी हासिल करेगा।

उन्होंने कहा, "ऐसे समय जब औद्योगिक देशों के विकास में गिरावट आई है, भारत लगातार प्रभावशाली दर से विकास कर रहा है। वर्ष 2008-09 के दौरान 6.7 प्रतिशत रही आर्थिक वृद्धि के बढ़कर वर्ष 2009-10 में 7.5 प्रतिशत होने की संभावना है। अब हम विश्वास से वर्ष 2010-11 में विकास दर में सुधार की ओर देखते हैं। मेरी सरकार का उद्देश्य वर्ष 2010-11 में विकास दर आठ प्रतिशत और 2011-12 में नौ प्रतिशत करना है।"

पिछले वित्तीय वर्ष में आई कुछ चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यद्यपि महंगाई चिंता का एक विषय बनी हुई है, खाद्यान्न उत्पादन में गिरावट और चावल, दाल तथा अनाजों की कीमतों में मजबूती से कीमतों का बढ़ना अपरिहार्य है।

उन्होंने कहा, "जहां हम खाद्य सुरक्षा पर किसी भी खतरे को टालने में सक्षम हुए हैं, वहीं अनाजों और खाद्य पदार्थो की कीमतों पर असुविधाजनक दबाव बढ़ा है।"

उन्होंने कहा कि मई 2009 में दोबारा सत्ता में आने के बाद से सरकार समग्र और तेज विकास के वादे को पूरा करने के लिए कार्य कर रही है।

सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आधारभूत ढांचे, कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि विकास प्रक्रिया कमजोर वर्गो के लिए पर्याप्त संवेदनशील बन सके।

राष्ट्रपति ने कहा कि विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में अपने केंद्र खोलने देने की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा और इस सिलसिले में एक विधेयक लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण में भारत अपने प्रयासों को जारी रखेगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्र सरकार पूर्वोत्तर के राज्यों के तीव्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, "पूर्वोत्तर के राज्यों के तीव्र अधोसंरचनात्मक विकास के लिए हमारी सरकार कटिबद्ध है। सड़क विकास संबंधी विशेष योजना के तहत क्षेत्र की 10,000 किलोमीटर सड़कों का निर्माण कार्य जारी है।"

उन्होंने कहा कि विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी। इस मुद्दे पर सरकार संबंधित देशों से सूचनाओं का आदान प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा, "कर संबंधी सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए वैश्विक प्रयासों में हम भी शामिल हैं। मेरी सरकार ने देश के बाहर जमा काले धन को वापस लाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसी दिशा में आयकर कानून 1961 में संशोधन किया गया। स्विटजरलैंड से कर समझौते पर पुन: बातचीत हो रही है।"

अपने 50 मिनट के संबोधन में राष्ट्रपति ने सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान शुरू हुए कार्यक्रमों, योजनाओं और नीतियों का उल्लेख किया और कहा कि समग्र विकास मुख्य केंद्र बिंदु बना रहेगा।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को उस सरकारी विज्ञापन सरीखा करार दिया है जिसमें सरकारी कार्यक्रमों का संकलन होता है। पार्टी ने कहा है कि देश आज कई चुनौतियों का सामना कर रहा है लेकिन राष्ट्रपति के अभिभाषण में उनसे निपटने के उपायों की दिशा का स्पष्ट अभाव है।

भाजपा संसदीय दल की ओर से जारी बयान में कहा गया, "खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बोझ तले देश दबा हुआ है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में इस दिशा में सरकार के रुख या उसकी किसी नीति का कोई जिक्र नहीं है। यह सरकार आम आदमी के प्रति असंवेदनशील है।"

पार्टी के मुताबिक, "राष्ट्रपति के अभिभाषण में कहा गया है कि देश में आंतरिक सुरक्षा की स्थिति नियंत्रण में है। ऐसा कहना आतंकवाद और नक्सलवाद जैसी समस्याओं को कमतर आंकना है। इन समस्याओं से कैसे निपटा जाए, इस बारे में राष्ट्रपति के अभिभाषण में कोई रोडमैप नहीं है।"

पार्टी ने कहा है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में इस शर्त पर पाकिस्तान से वार्ता की वकालत की गई है कि वह अपनी सरजमीं से भारत के खिलाफ हो रही आतंकवादी गतिविधियों को नेस्तनाबूद करे, जबकि सरकार का रुख कुछ और ही है। पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचा भारत के खिलाफ गतिविधियों में लिप्त है और सरकार वार्ता की तैयारी कर रही है।

महिला आरक्षण विधेयक के बारे में पार्टी ने कहा कि सरकार ने इसे जल्द से जल्द संसद के दोनों सदनों से पारित कराने का आश्वासन दिया है। भाजपा उम्मीद करती है कि राष्ट्रपति के पिछले सात अभिभाषणों में महिला आरक्षण विधेयक का जो हश्र हुआ, कहीं इस बार भी महिला आरक्षण विधेयक का वही हश्र न हो जाए।

उधर, मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी महंगाई जैसे विषय पर सुधारात्मक उपायों का जिक्र न किए जाने के लिए राष्ट्रपति के अभिभाषण की आलोचना की। माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "सरकार का रवैया हमेशा की तरह है।"

उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि महंगाई जैसे विषय पर सुधारात्मक उपायों का इसमें कोई जिक्र नहीं है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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