जम्मू एवं कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन सहन नहीं : राज्यपाल (लीड-2)
बजट सत्र के पहले दिन राज्य विधानसभा के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, "सरकार हर कीमत पर मानवाधिकारों की रक्षा करेगी और मानवाधिकारों का उल्लंघन सहन नहीं किया जाएगा।"
कश्मीर में कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्थरबाजी करने और फिर इन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षाबलों द्वारा गोलियों और आंसू गैस का प्रयोग करने के बाद से मानवाधिकारों का हनन एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
राज्यपाल ने कहा कि 2008 के विधानसभा चुनावों में मतदाताओं ने बड़ी संख्या में हिस्सा लेकर लोकतंत्र में अपना विश्वास प्रदर्शित किया था।
उन्होंने कहा, "दिसम्बर 2009 में घोषित शेर-ए-कश्मीर रोजगार योजना बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक कदम है।" इस योजना का मकसद राज्य के बेरोजगार युवाओं को ऋण, जमीन देकर और सरकारी विभागों में रिक्त पद भरकर रोजगार उपलब्ध कराना है। यह योजना इस साल अप्रैल से प्रभावी होगी।
राज्यपाल ने कश्मीरी हिंदू युवाओं के रोजगार के मुद्दे और 1990 में इस्लामी आतंकवादियों के डर से घाटी छोड़कर गए इस समुदाय के लोगों के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की 1,618 करोड़ रुपये की राहत एवं पुनर्वास योजना का भी जिक्र किया।
वोहरा ने कहा, "सरकार जम्मू एवं कश्मीर में शांति और प्रगति की दिशा में लगातार काम करेगी।"
इससे पहले जब राज्यपाल ने अपना अभिभाषण शुरू किया तो विपक्षी सदस्यों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मुख्य विपक्षी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के सदस्यों का आरोप था कि राज्य में 14 महीने पुरानी उमर अब्दुल्ला सरकार सभी मोर्चो पर विफल रही है।
पीडीपी सदस्यों ने कहा, "निर्दोष मारे जा रहे हैं।" पार्टी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार अलगाववादियों के हाथों में खेल रही है और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता कर रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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