यूरोपीय देशों की एकता की परीक्षा

ग्रीस के प्रधानमंत्री ने कहा है कि उनके देश का वित्तीय संकट यूरोपीय एकता के लिए चुनौती है.
उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि उनके देश को वित्तीय मदद की नहीं बल्कि राजनीतिक मदद की ज़रूरत है.
असाधारण वित्तीय घाटे में फँसे हुए ग्रीस को लेकर यूरोप के भीतर पिछले कुछ अरसे से काफ़ी खलबली मची हुई है.
ग्रीस ने नौ साल पहले यूरो को अपनाया जो 16 देशों में चलनेवाली एकीकृत मुद्रा है.
उससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार, ख़ासकर यूरो मुद्रा वाले देशों में उसकी पहुँच बढ़ी, और अब जब उसके सामने संकट आया है तो ये संकट भी यूरो देशों तक पहुँचने का ख़तरा है.
हुआ दरअसल ये कि ग्रीस सरकार अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचने के बाद कर्ज़ ले-लेकर ख़र्चे करती रही जिससे शुरूआत में अर्थव्यवस्था काफ़ी फली-फूली.
सरकार ख़र्च करती रही, सरकारी कर्मचारियों की तनख़्वाह बढ़ती रही. लेकिन दूसरी तरफ़ सरकारी ख़जाना ख़ाली होता रहा. और ऐसे में जब वैश्विक आर्थिक मंदी आई तो सरकार के पास कोई विकल्प नहीं बचा. ग्रीस के सिर पर अभी तीन खरब यूरो का कर्ज़ सवार हो चुका है.
अगर वह ये कर्ज़ ना संभाल सका तो इससे पूरा यूरोक्षेत्र डाँवाडोल हो सकता है. ग्रीस का घाटा अभी उसके सकल घरेलू उत्पाद के 13 प्रतिशत से थोड़ा कम हो चुका है.
जबकि यूरोपीय संघ के नियम कहते हैं कि किसी भी सदस्य देश का घाटा जीडीपी के तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए.
दूसरे देश ग्रीस से नाराज़ हैं और कह रहे हैं कि ग्रीस ने जान-बूझकर आँकड़ों की पेंच लगाकर असलियत पर पर्दा डाले रखा.
पिछले सप्ताह यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों ने इस बारे में चर्चा के बाद एक बयान जारी किया और ग्रीस से कहा कि वह अगले महीने तक घाटा कम करने के लिए कुछ प्रभावी क़दम उठाकर दिखाए.
अब ग्रीस के प्रधानमंत्री जॉर्ज पापेंद्रू ने चेतावनी दे दी है कि उनके देश का संकट यूरोप के दूसरे देशों तक भी पैर पसार सकता है.
उन्होंने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कहा कि ग्रीस का ये संकट आधुनिक दौर में उसके सामने आई सबसे कड़ी चुनौतियों में से एक है.
ग्रीक प्रधानमंत्री ने कहा कि अभी ग्रीस को राजनीतिक मदद चाहिए, ना कि वित्तीय मदद जिससे कि ग्रीस की साख बनी रहे और कर्ज़ माँगने पर उसके साथ दूसरे देशों की तरह ही बर्ताव हो सके.
उन्होंने कहा कि ग्रीस को मदद ना मिलने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं.
उन्होंने कहा,"हमारा देश अकेले इससे नहीं जूझ सकता, ये एक यूरोपीय संकट बन चुका है, क्योंकि अगर बात बढ़ी तो संकट दूसरे ऐसे देशों तक जा सकता है जिनकी कोई ग़लती नहीं रही है."
उन्होंने कहा कि संकट कैसे सुलझेगा, अभी इसपर विचार चल ही रहा है, लेकिन उन्हें आशा है कि ये अभूतपूर्व चुनौतियाँ किसी सकारात्मक नतीजे पर पहुँचेंगी.
उन्होंने अपना इंटरव्यू दर्शकों से ये गुज़ारिश करते हुए ख़त्म किया कि वे ग्रीस आना बंद ना करें.
ग्रीस ब्रिटेन और समूचे यूरोप भर में एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल रहा है.
लेकिन कुल मिलाकर ग्रीक प्रधानमंत्री के इंटरव्यू का यदि कोई आशय निकालना हो तो वो यही होगा कि अभी बहुत कुछ करने के लिए बाक़ी है और ग्रीस के संकट को तसल्ली से लिया जा सके इसका समय अभी दूर है.












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