निवेशक को परेशान करने के लिए सरकार को लगाई लताड़
न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर ने भुगतान आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह किशनी देवी और उनके पति गंगा गुप्ता की बचतों को ब्याज सहित वापस करे।
गुप्ता ने अपनी गाढ़ी कमाई को अजुधी टेक्सटाइल्स मिल्स लिमिटेड (एटीएमएल) में 6,500 रुपये, 3,136 रुपये, 2,500 रुपये, 6,000 रुपये और 5,000 रुपये के पांच सावधि जमा खाते के रूप में लगभग चार दशक पहले 1970 में जमा कराया था।
न्यायाधीश ने पिछले सप्ताह दिए अपने आदेश में कहा, "आज के हिसाब से यह राशि भले ही छोटी हो सकती है, लेकिन किशनी देवी और गंगा दत्त गुप्ता के लिए यह उनके जीवन की पूरी कमाई है।" अदालत ने दोनों बुजुर्गो को इस मामले में लंबे समय तक लटकाने के लिए प्रत्येक को 15,000 की अतिरिक्त राशि देने का भी सरकार को आदेश दिया है।
ज्ञात हो कि वर्ष 1971 में सरकार ने एटीएमएल का अधिग्रहण कर लिया था और बाद में सिक टेक्सटाइल अंडरटेकिंग्स कानून-1974 के तहत उसका राष्ट्रीयकरण कर दिया गया था। इसके साथ ही एटीएमएल के जमाकर्ताओं और निवेशकों के दावों को निपटाने के लिए सरकार ने एक भुगतान आयुक्त की नियुक्ति कर दी थी।
किशनी देवी और गुप्ता ने भी अपने दावे आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए थे, लेकिन विभिन्न कारणों का हवाला देकर उन्हें उनकी राशि के भुगतान से इंकार कर दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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