नकाबधारी अधिकारी के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई
इस अधिकारी ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान सिल्दा शिविर पर नक्सली हमले में 24 जवानों की मौत के बाद ईएफआर के मनोबल को लेकर सवाल खड़े किया था।
ईएफआर के विशेष महानिरीक्षक बिनॉय चक्रबर्ती ने प्रशासन पर ईएफआर का दुरुपयोग करने और उसके साथ बुरा बर्ताव करने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया था। लेकिन संवाददाता सम्मेलन के दौरान अधिकारी का अपने चेहरे को छुपाए रखने की कोशिश ने मीडिया का ज्यादा ध्यान खींचा।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा है कि सेवा नियमों का उल्लंघन करने के लिए चक्रबर्ती के खिलाफ विभागीय कार्रवाई किए जाने का निर्णय प्रशासन के उच्च स्तर पर लिया जा चुका है। लेकिन सप्ताहांत की छुट्टियों के कारण कागजी कार्रवाई अभी शुरू नहीं हो पाई है।
पश्चिम मिदनापुर जिले के सलुआ में स्थित ईएफआर मुख्यालय में आयोजित एक सनसनीखेज संवाददाता सम्मेलन में चक्रबर्ती ने उचित अधोसंरचना मुहैया न कराने के लिए अधिकारियों की जमकर खिंचाई की थी, यहां तक कि मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक मनोज वर्मा को भी उन्होंने नहीं छोड़ा था।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "मैं परेशान हूं कि चक्रबर्ती ने ऐसा क्यों किया। राज्य के पुलिस महानिदेशक भूपिंदर सिंह ने भी सिल्दा में मीडिया को संबोधित किया था, लेकिन उन्होंने अपने चेहरे को नहीं ढंका था।"
राज्य के वित्त मंत्री असीम दासगुप्ता ने भी पश्चिम मिदनापुर जिले में स्थित सलुआ शिविर में मंगलवार को मंत्रियों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। मृत जवानों के परिजनों की नाराजगी का बहादुरी से सामना किया था और बिना चेहरे को ढंके लोगों से बातचीत की थी।
इस बीच ईएफआर जवानों के परिजनों ने चक्रबर्ती के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्णय के खिलाफ सालुआ में एक शांति मार्च निकाला। बाद में प्रदर्शनकारियों के एक प्रतिनिधि ने मांग की कि सरकार अपने निर्णय को 48 घंटे के भीतर वापस ले।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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