भाजपा के अधिवेशन पर राहुल के दलित प्रेम की छाया (राउंडअप)

गड़करी ने अधिवेशन के पहले दिन कार्यकारिणी की बैठक मे कहा कि डा. अम्बेडकर सामाजिक न्याय के प्रति मूर्ति थे, उन्होने दलितों के लिए ठीक उसी तरह से संर्घष किया जिस तरह मार्टिन लूथर किंग ने अश्वेतों की खातिर किया था। उन्होंने पार्टी के नेताओं से अपील की कि वे सामाजिक न्याय, छुआछूत को खत्म करने के लिए संघर्ष करें। यह संघर्ष वोट बैंक के लिए नहीं राजनीतिक निष्ठा का परिचय होगा।

देश में बढ़ते आतंकवाद और नक्सलवाद के लिए गडकरी ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भाजपा के लिए देश की सुरक्षा सवरेपरि है। उन्होंने कश्मीर समस्या की चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान मे अमेरिका के दबाव में कश्मीर के समाधान की कोशिश की जा रही है।

भाजपा नेता बड़ी रेखा खींचे : गडकरी

गडकरी ने नेताओं का आहवान किया कि वे बड़े दिल वाले बने और अपनी रेखा बड़ी खींचें, क्योंकि छोटे दिल से काम नहीं होता।

उन्होंने नेताओं से कहा कि वे आत्म निरीक्षण करें कि उनका राजनीतिक भविष्य महत्वपूर्ण है या संगठन का। छोटे कार्यकर्ताओं में एक धारणा घर करती जा रही है कि उन्हें कई वर्षो के संघर्ष के बाद भी कुछ नहीं मिला। वहीं नेता बहुत कुछ पा गए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हार की वजह 'तेरी-मेरी' होती है, चुनाव में टिकट उन्हें दिया जाए जो चुनाव जीत सकते हैं। इतना ही नहीं पहले देश, फिर संगठन और उसके बाद हम की भावना का विकास जरूरी हैं।

आई वाजपेयी की याद

'छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता, टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता' ये पंक्तियां पढ़कर गडकरी ने पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेशन मे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया।

गडकरी ने वाजपेयी को याद किया और कहा कि वे जल्दी स्वस्थ हों यह सभी की ईश्वर से कामना है। वाजपेयी अस्वस्थ होने के कारण इस अधिवेशन में हिस्सा लेने नहीं ले रहे हैं।

आयोजन स्थल कुशाभाऊ ठाकरे नगर से लेकर इंदौर के विभिन्न स्थलों पर लगे होर्डिग और पोस्टर्स में वाजपेयी की तस्वीर नजर आ रही थी मगर उनके अधिवेशन में न आने की कमी सभी को खल रही है।

आडवाणी को प्रधानमंत्री न बना पाने का मलाल: राजनाथ

पार्टी पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह को इस बात की टीस अब भी है कि उनके कार्यकाल के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सके।

कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते समय राजनाथ का दर्द उभर कर सामने आ गया। उन्होंने कहा कि भाजपा दूसरी बार सत्ता में न आने के मिथक को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तोड़ने में सफल रही है। वहीं उत्तर प्रदेश में हार कमजोरियों के कारण हुई है। उन्हें सबसे ज्यादा टीस आडवाणी को प्रधानमंत्री न बना पाने की है।

राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि पार्टी का अध्यक्ष राजा विक्रमादित्य के समान होता है जिसे सभी को साथ लेकर चलना होता है। राजनाथ ने अपने कार्यकाल की उपलब्धियों और कमियों का ब्योरा भी दिया।

बाहर गए नेताओं की वापसी का प्रस्ताव नहीं : रविशंकर

यहां एक संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पार्टी छोड़कर गए नेताओं की वापसी का अभी कोई प्रस्ताव नहीं हैं।

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी और भाजपा के अध्यक्ष नितिन गड़करी के दलित प्रेम पर पूछे गए सवाल पर प्रसाद ने कहा कि दोनों की तुलना करना ठीक नहीं है। लोकंतत्र में सभी को जनता के बीच जाकर अपनी बात कहने का अधिकार है। ऐसा भी नहीं है कि देश भर का युवा राहुल गांधी के साथ है, अगर ऐसा ही होता तो विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक सहित अन्य राज्यों में भाजपा को जीत नहीं मिली होती।

अधिवेशन की सुरक्षा में एक साथ लगे हैं सपेरे और सशस्त्र जवान

इंदौर के कुशाभाऊ ठाकरे नगर में चल रहे अधिवेशन में दो तरह के खतरे मंडरा रहे हैं। सम्मेलन स्थल के अंदर से सांपों का खतरा है तो बाहर से आतंकी हमले का। यही कारण है कि सुरक्षा में सपेरों और हथियारबंद सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।

भाजपा के अधिवेशन के लिए इंदौर शहर से बाहर कुशाभाऊ ठाकरे नगर बसाया गया है। यह नगर इंदौर बायपास पर वीरान पड़े इलाके में बसाया गया। अधिवेशन में पहुंचे भाजपा नेताओं और प्रतिनिधियों के ठहरने के लिए तंबू लगाए गए हैं। ये तंबू आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हैं मगर जमीन कच्ची होने के कारण लगातार सांप निकल रहे हैं। इन सांपों को पकड़ने के लिए सपेरे तैनात किए गए हैं।

आयोजन स्थल पर तैनात किए गए सपेरे अब तक कई सांपों को पकड़ चुके हैं। फिर भी सांपों का खतरा बना हुआ है। इसलिए सपेरों को सतर्क रहने को कहा गया है।

पुणे में हुए आतंकी हमले के बाद इंदौर को अति संवेदनशील माने जाने के बाद जगह-जगह हथियारबंद जवानों की तैनाती की गई है। पुलिस के जवानों, आतंकवाद निरोधक दस्ते, बम निरोधी दस्ते और खोजी कुत्तों को जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इतना ही नहीं इंदौर की सभी प्रमुख सड़कों और चौराहों पर पुलिस के जवान तैनात हैं जो गुजरने वाले वाहनों की तलाशी ले रहे हैं।

गौरतलब है कि इंदौर और पूरा मालवा अंचल प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का गढ़ रहा है। सिमी के कई कार्यकर्ता यहां पकड़े भी जा चुके है। इसलिए पुणे में हुए विस्फोट के बाद यहां अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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