पवार ने खाद्य सुरक्षा के लिए जीएम फसलों की वकालत की (लीड-1)
पवार ने कहा, "ऐसे समय में जब आबादी दोगुनी हो चुकी है, हमें हर हाल में उत्पादन बढ़ाना होगा और इस सीमितता के बीच कि भूमि और जल में बढ़ोतरी की कोई संभावना नहीं है।"
लेकिन उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय पर्यावरण मंत्रालय ही ले सकता है।
नई दिल्ली में कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के दो दिवसीय सम्मेलन और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के निदेशकों की बैठक का उद्घाटन करते हुए पवार ने कहा, "बीटी बैंगन के बारे में लिए गए हालिया फैसले को हमारे लिए आघात के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। परंतु यह एक चुनौती है जिस पर जीत हासिल करनी है।"
यहां आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों के मसले पर पवार ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के रुख का एक तरह से विरोध किया। रमेश ने पिछले दिनों बीटी बैंगन पर रोक लगा दी थी।
पवार ने कहा, "कृषि की पारंपरिक तकनीक, सामने खड़ी चुनौतियों से निपटने में पर्याप्त नहीं हैं। जैव प्रौद्योगिकी के साथ सबसे आकर्षक बात यह है कि यह उत्पादकता बढ़ाने, उत्पादन लागत घटाने, जैव विविधता संरक्षित करने, बाहरी संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने, सामाजिक-आर्थिक लाभों को बढ़ाने और गरीबी दूर करने तथा देश का विकास करने में सक्षम है।"
बाद में संवाददाताओं के साथ बातचीत में पवार ने कहा कि आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें देश में खाद्य सुरक्षा की समस्या का समाधान प्रस्तुत कर सकती हैं। लेकिन उन्होंने कहा, "हम पर्यावरण मंत्रालय द्वारा लिए गए निर्णय का आदर करेंगे, जो हमें अंतिम दिशानिर्देश दे सकता है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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