आरोप साबित हुए बिना सांसदों को नहीं हटाया जा सकता : सर्वोच्च न्यायालय
नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि धांधली या भ्रष्टाचार से चुनाव जीतने के आरोपी जनप्रतिनिधियों को बिना आरोप साबित हुए महज आरोपों के आधार पर नहीं हटाया जा सकता।
न्यायाधीश डी. के. जैन और न्यायाधीश पी. सथसिवम की खंडपीठ ने वर्ष 2004 में महाराष्ट्र के सिन्नार लोकसभा क्षेत्र से चुने गए भाजपा के पूर्व सांसद मानिकराव शिवाजी कोकाटे के खिलाफ दायर की गई याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया।
कोकाटे के खिलाफ चुनाव हारने वाले संयुक्त प्रतिशील गठबंधन (संप्रग) के प्रत्याशी तुकाराम डिघोले की याचिका खारिज करते हुए न्यायालय ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप आपराधिक आरोपों के समान ही होते हैं। इसलिए इन्हें साबित करने के लिए ठोस आधार होने चाहिए। संभावनाओं के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित नहीं किया जा सकता।
डिघोले 2004 में हुए लोकसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार मानिकराव से करीब 20 हजार मतों से चुनाव हार गए थे।
डिघोले ने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि मानिकराव ने चुनाव के दौरान मराठा मतदाताओं से कहा कि उन्हें इसलिए वे मत दें क्योंकि वह उनके समुदाय से संबंध रखते हैं।
अपने आरोपों के पक्ष में डिघोले ने न्यायालय के समक्ष कुछ ऑडियो कैसेट पेश किए और दावा किया कि ये उन्हें निर्वाचन आयोग से प्राप्त हुई हैं, जिसे चुनाव प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड किया गया था।
डोघले हालांकि ऐसा कोई सबूत नहीं पेश कर सके, जिससे साबित हो कि कैसेट में आवाज मानिकराव की ही थी। साथ ही वह निर्वाचन आयोग से कैसेट प्राप्त करने की रसीद भी पेश नहीं कर सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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