उनींदे रहने वाले किशोरों के दुर्घटना का शिकार होने की आशंका ज्यादा

लंदन, 15 फरवरी (आईएएनएस)। एक नए अध्ययन से पता चला है कि वाहन चलाने के दौरान किशोरों के नींद में रहने से उनके वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका अधिक होती हैं।

अध्ययन में कहा गया है कि नींद में रहने वाले या भरपूर नींद न लेने वाले किशोर चालकों के दुर्घनाग्रस्त होने की संभावना दुगुनी होती है।

अध्ययन में 339 छात्रों को शामिल किया गया था। इनमें से 80 छात्रों की पहले भी कम से कम एक बार दुर्घटना हो चुकी थी और 15 प्रतिशत छात्रों में दुर्घटना की मुख्य वजह उनका उनींदा रहना था।

ऐसे 56 प्रतिशत छात्र जो पहले भी दुर्घटना के शिकार हो चुके वे वाहन चलाते समय नींद में रहते थे जबकि वे 35 प्रतिशत छात्र जिनकी दुर्घटना नहीं हुई वे नींद में नहीं रहते थे।

इटली की युनीवर्सिटी ऑफ बोलोग्ना के प्रोफेसर व अध्ययनकर्ता फैबिओ सिरिग्नोटा कहते हैं कि नींद में रहने के कारण होने वाली दुर्घटनाओं से बचने के लिए उनींदापन महसूस होने पर वाहन को किनारे लगाकर 10 से 15 मिनट की झपकी ले लेना चाहिए।

सिरिग्नोटा का कहना है कि नींद या थकान को दूर भगाने के लिए वाहन की खिड़कियां खोलने, रेडियो सुनने या कॉफी पीने के उपाय कारगर नहीं होते।

अध्ययनकर्ताओं ने जिन 339 छात्रों पर अध्ययन किया था उनमें सभी की उम्र 18 से 21 वर्ष के बीच थी। इनमें से 58 प्रतिशत लड़के थे।

अध्ययन से ज्ञात हुआ कि इन छात्रों को प्रतिदिन 9.2 घंटे की नींद की आवश्यकता थी लेकिन वे केवल 7.3 घंटे की औसत नींद ही ले पाते थे। केवले छह प्रतिशत छात्र ही नौ घंटे की नींद पूरी करते थे।

नींद की कमी या अच्छी नींद न ले पाने का उनकी सतर्कता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इनमें से 64 प्रतिशत छात्रों में दोपहर के समय नींद आने की परेशानी थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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