आतंकवाद और कश्मीर समस्या नेहरू की नीतियों की देन : आडवाणी
नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा है कि पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पाकिस्तान नीति के चलते ही देश को आतंकवाद और कश्मीर जैसी समस्या के रूप में हमें दो घाव मिले हैं, जिनसे हम आज भी जूझ रहे हैं।
आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा है, "कांग्रेस ने हमेशा पंडित नेहरू को देश की विदेश नीति के सबसे बड़े आदर्श के रूप में पेश किया है जबकि हमारे राजनीतिक आंदोलन के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुकर्जी ने नेहरू की पाकिस्तान और चीन नीति को उनकी सबसे बड़ी भूल बताया था।"
उन्होंने कहा, "चीन ने 1962 में हमें जो धोखा दिया उससे उन्हें बहुत सदमा लगा और संभवत: वहीं उनकी मौत का कारण भी बना। उन्होंने पाकिस्तान संबंधी मामलों को भी गलत तरीके से निपटाने की कोशिश की। उसी का नतीजा है कि आतंकवाद और कश्मीर समस्या के रूप में हमें ऐसे घाव मिले जो अभी तक हमें दर्द पहुंचा रहा है।"
आडवाणी ने प्रसिद्ध लेखक और पत्रिका 'न्यूजवीक इंटरनेशनल' के संपादक फरीद जकारिया द्वारा हाल ही नेहरू के संदर्भ में भारत की विदेश नीति पर लिखी गई पुस्तक 'द पोस्ट अमेरिकन वर्ल्ड' का उल्लेख करते हुए कहा, "भारत के विरोधाभास का केंद्र यह है कि इसका समाज विश्व की चुनौतियों का सामना करने के लिए विश्वस्त और इच्छुक है लेकिन सत्ताधारी वर्ग इसे लेकर भ्रम और हिचकिचाहट में है।"
उन्होंने कहा, "जकारिया ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि नेहरू ने अंतिम ब्रिटिश वायसरॉय लार्ड माउंटबेटेन की एक सशक्त रक्षा प्रमुख बनाने की सलाह को ठुकरा दिया था।"
आडवाणी ने कहा कि पंडित नेहरू 1947 से 1964 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान विदेश मंत्री का कार्यभार भी उन्हीं के पास था। देश के पहले विदेश सचिव रहे के. पी. एस. मेनन की जीवनी का उल्लेख करते हुए आडवाणी ने कहा, "हमारी विदेश नीति सिर्फ और सिर्फ नेहरू पर आधारित थी।"
आडवाणी ने 1952 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के लिए और उसे चीन को दिए जाने पर जोर देने के लिए भी नेहरू की आलोचना की। उन्होंने कहा, "इसके चलते हमने अपने हित को ठेस पहुंचाया।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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